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Ujjain News : सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

चार मंजिला होटल नुमा भवन ढहाया- हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर निगम की कार्रवाई

-शिप्रा किनारे अवैध निर्माणों पर कस रहा शिकंजा



उज्जैन। सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार जारी है। शुक्रवार सुबह निगम की टीम ने जूना अखाड़े से जुड़े हरियाणा सेवा आश्रम में बने चार मंजिला होटलनुमा भवन को जमींदोज कर दिया। यह आश्रम महामंडलेश्वर ज्योतिगिरी जी महाराज का है। करीब 8 हजार वर्गफीट में बने इस भवन को हटाने के लिए निगम ने दो बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की गई। चार पोकलेन मशीनों और एक जेसीबी की मदद से भवन को पूरी तरह ढहा दिया गया। इसका निर्माण करीब डेढ़ साल से चल रहा था।


सिंहस्थ के लिए आरक्षित जमीन पर बिना अनुमति किए गए निर्माणों को हटाने का अभियान अब तेज होता दिखाई दे रहा है। इससे पहले माधवानंद आश्रम, शंकराचार्य मठ सहित कई स्थानों पर कार्रवाई हो चुकी है। सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के हिस्से को भी हटाया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान का एक हिस्सा भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण हटाया जा चुका है। नगर निगम की कार्रवाई से साफ है कि सिंहस्थ की तैयारियों के लिए चिह्नित जमीन और प्रस्तावित मार्गों पर बाधक निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।


हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कार्रवाई....


नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर के मुताबिक, सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध निर्माणों का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने नगर निगम को अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद निगम ने कार्रवाई शुरू की। हरियाणा सेवा आश्रम में बने नए भवन को तोड़ा गया, जबकि आश्रम के पुराने हिस्से को सुरक्षित रखा गया। भवन के दूसरी ओर लगा वॉटर सॉफ्टनर भी हटाया गया।

निगम के अनुसार, आश्रम में निर्माण हटाने के लिए पहले दो बार नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद शुक्रवार सुबह मशीनों के साथ निगम की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की। चार पोकलेन और एक जेसीबी की मदद से चार मंजिला भवन को पूरी तरह ढहा दिया गया।


2023 में लगी थी याचिका, शिप्रा प्रदूषण का मुद्दा भी उठा...


सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध निर्माणों और शिप्रा नदी के प्रदूषण का मामला वर्ष 2023 में हाईकोर्ट पहुंचा था। उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी ने याचिका दायर कर बताया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर 100 से 200 मीटर के दायरे में होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों के निर्माण हो गए हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे शिप्रा नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। मामले की सुनवाई के बाद 5 मई को हाईकोर्ट ने नगर निगम को 15 जून तक अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध निर्माणों को लेकर निगम की कार्रवाई तेज हुई है। इस मामले में नदी किनारे के निर्माणों के साथ ही सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर किए गए निर्माण भी कार्रवाई के दायरे में आ रहे हैं। हालांकि, प्रत्येक निर्माण के मामले में अनुमति, भूमि की स्थिति और संबंधित आदेश के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।


माधवानंद आश्रम की दो मंजिला इमारत भी ढहाई...


हरियाणा सेवा आश्रम से पहले नगर निगम ने लाल पुल क्षेत्र में सिंहस्थ के लिए आरक्षित जमीन पर बन रहे माधवानंद आश्रम की दो मंजिला इमारत को भी ढहा दिया था। करीब 10 हजार वर्गफीट में बन रही इस इमारत को तोड़ने के लिए दो पोकलेन मशीनों और चार जेसीबी की मदद ली गई थी। करीब 25 दिन पहले हुई इस कार्रवाई में निर्माण को पूरी तरह हटाया गया था। इससे पहले 25 फरवरी 2026 को सिंहस्थ क्षेत्र में शंकराचार्य मठ और धर्मशालाओं सहित पांच संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी। लोहे के पुल के पास नरसिंह घाट जाने वाले रास्ते पर कर्कराज पार्किंग के नजदीक पुण्यानंद गिरि महाराज के आश्रम की तीन मंजिला इमारत भी कार्रवाई के दायरे में आई थी। करीब 15 हजार वर्गफीट में बनी इस इमारत में एसी और बिना एसी वाले कुल 54 कमरे थे। निगम की टीम ने एक दिन की कार्रवाई में भवन को करीब 70 प्रतिशत तक तोड़ दिया था। इन कार्रवाइयों के जरिए निगम सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर बिना अनुमति किए गए निर्माणों को हटाने में जुटा है।


शाही मस्जिद पर कार्रवाई के दौरान हुआ था पथराव...


सितंबर 2026 में सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान विवाद की स्थिति बन गई थी। विरोध के बीच पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला। इस मामले में गिरफ्तारियां भी हुई थीं। बाद में मस्जिद प्रबंधन से जुड़े लोगों ने आगे आकर प्रभावित हिस्से को हटाने का काम किया। कार्रवाई के दौरान गुंबद और मीनार के कुछ हिस्से भी हटाए गए थे।

शाही मस्जिद का मामला सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों के निर्माणों को लेकर चर्चा में रहा। इसके अलावा खड़े हनुमान मंदिर का बाहरी ढांचा भी हटाया गया था, जबकि प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया। मदीना कॉलोनी और बेगम बाग क्षेत्र में भी मकान, गोदाम और अन्य निर्माणों पर कार्रवाई की जा चुकी है।


सिंहस्थ से पहले जमीन खाली कराने की चुनौती...


सिंहस्थ 2028 में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण, आवागमन और मेला क्षेत्र के विकास की योजनाओं पर काम चल रहा है। ऐसे में सिंहस्थ के लिए आरक्षित जमीन पर हुए निर्माणों को हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। अब तक आश्रमों, धार्मिक स्थलों और अन्य संपत्तियों पर हुई कार्रवाई से स्पष्ट है कि निगम ने अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रखा है।

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