
उज्जैन। विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित विक्रम नाट्य समारोह में शुक्रवार को महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध नाटक ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ का मंचन हुआ। प्रेम, विरह और पुनर्मिलन की मार्मिक कथा पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। नाटक का हिन्दी रूपांतरण श्री मोहन राकेश द्वारा किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत नृत्य-नाटिका से हुई, जिसके बाद अतिथि श्री प्रकाश रघुवंशी , श्री आनंद जी पंड्या ने कलाकारों का स्वागत- सम्मान किया।

महाराज विक्रमादित्य शोध पीठ, संस्कृति विभाग (मप्र शासन) एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (भारंगम) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नाट्य महोत्सव के पंचम दिवस पर कालिदास अकादमी के संकुल भवन में शाम 7.30 बजे से नाटक प्रस्तुत किया गया। नाट्य निर्देशन (रूपांतरण) एवं नृत्य संयोजन सुश्री अर्पिता धगत (मध्यप्रदेश) ने किया।
नाटक में दर्शाया गया कि राजा दुष्यंत वन में ऋषि कण्व के आश्रम पहुँचते हैं, जहाँ उनकी भेंट शकुंतला से होती है और दोनों गंधर्व विवाह करते हैं। दुष्यंत द्वारा दी गई अंगूठी पहचान-चिह्न बनती है, लेकिन ऋषि दुर्वासा के शाप के कारण दुष्यंत शकुंतला को भूल जाते हैं। अंगूठी नदी में गिर जाने से स्थिति और जटिल हो जाती है। अंततः अंगूठी मिलने पर दुष्यंत की स्मृति लौटती है और दोनों का पुनर्मिलन होता है।

मंच पर दुष्यंत के रूप में विश्मय कुमार, विकास रावत और पुष्पराज सिंह बघेल ने अभिनय किया, जबकि शकुंतला की भूमिका सुश्री नूपुर पांडे,सुश्री शुभांशी शर्मा,सुश्री रवीना मिंज,सुश्री यशवानी गौंड और सुश्री प्रिया गोस्वामी ने निभाई। विदूषक/ऋषि कण्व की भूमिका गुरिंदर कुमार ने प्रस्तुत की। माता अनुसूया के रूप में सुश्री महिमा अग्रवाल,प्रियंवदा के रूप में सुश्री शुभांशी शर्मा, गौतमी के रूप में सुश्री शुभांगी ओखड़े, नट/राजपुरोहित के रूप में देववर्ष अहिरवार तथा नट/ऋषि दुर्वासा के रूप में दीपेंद्र सिंह लोधी मंच पर दिखाई दिए। नटी की भूमिका सुश्री रवीना मिंज और सुश्री प्रिया गोस्वामी ने निभाई। शारंगरव के रूप में पुष्पराज सिंह बघेल तथा शारद्वत के रूप में दीपेंद्र सिंह लोधी ने अभिनय किया।
21 फरवरी को ‘चतुर्भाणी’ का मंचन
विक्रम नाट्य समारोह के तहत 21 फरवरी को कालिदास अकादमी के संकुल में शाम 7.30 बजे से राजकुमार कामले (मध्यप्रदेश) द्वारा ‘चतुर्भाणी’ की प्रस्तुति दी जाएगी।