
उज्जैन। होलाष्टक फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होगा और पूर्णिमा तक रहेगा। यानी 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च होलिका दहन के साथ इसका समापन हो जाएगा। होलिका दहन शाम 5.47 बजे बाद होगा। शास्त्रों के अनुसार इन 3 दिनों में नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हवन-पूजन करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन का दान करें।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलाष्टक 24 फरवरी को सुबह 07.02 बजे शुरू होगा। आठ दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु सहित आठों ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं। होलाष्टक में भगवान विष्णु, शिवजी, हनुमानजी और भक्त प्रह्लाद की पूजा करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि होलिका दहन के लिए उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो, लेकिन भद्रा मध्य रात्रि से पहले समाप्त हो जाए तो प्रदोष के बाद जब भद्रा समाप्त हो, तब होलिका दहन करना चाहिए। 3 मार्च को चंद्रग्रहण है। ग्रहण समाप्ति का समय शाम 06.47 बजे है। अतः ग्रहण समाप्ति के बाद प्रदोष काल में एकम तिथि के बावजूद होलिका दहन कर सकते हैं।
एकम तिथि में भी होलिका दहन संभव
पूर्णिमा 2 मार्च सोमवार शाम 5.56 बजे से लगेगी। सोमवार शाम 5.56 से ही भद्रा लगेगी जो दूसरे दिन सुबह 5.29 बजे तक रहेगी। 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि में में प्रदोष काल मिल रहा एवं 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल से पहले ही समाप्त हो जाएगी लेकिन 2 मार्च को प्रदोष काल भद्रा से दूषित है। अतः इस दिन होलिका दहन नहीं हो सकता। 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि के साढ़े तीन प्रहर से अधिक कालव्यापिनी होने से एकम तिथि लगने पर भी होली दहन कर सकते हैं।
खग्रास चंद्रग्रहण रहेगा
सूतक काल : 3 मार्च को सुबह 06.20 बजे से लगेगा। ग्रहण आरंभ (स्पर्श): दोप. 03.20 बजे से। ग्रहण समाप्त शाम 06.47 बजे तक। पर्व कालः 03 घंटे 27 मिनट का रहेगा।