
उज्जैन। भगवान महाकालेश्वर की भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारी में सोमवार को भगवान महाकालेश्वर चंद्रशेखर स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देने प्रजा के बीच पहुंचे। सवारी मार्ग के दोनों और हजारों की संख्या में भक्तगण इंतजार करते नजर आ रहे थे। पूरे मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे।
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति प्रशासक संदीप सोनी ने बताया कि भाद्रपद माह की प्रथम सवारी 4 सितंबर को निकली। श्रावण मास के 8 सोमवार के बाद आज भाद्रपद मास की पहली सवारी में महाकाल राजसी ठाट-बाट के साथ प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। शाम 4:00 बजे सभा मंडप में भगवान महाकालेश्वर का विधिवत पूजन अर्चन किया गया और उसके बाद सवारी मुख्य द्वार से आगे बड़ी। इस दौरान सशस्त्र पुलिस बल और पुलिस बैंड द्वारा भगवान महाकालेश्वर को परंपरा के अनुसार गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पालकी की सुरक्षा के लिए रस्सी का घेरा बनाया गया था।
इन स्वरूपों में प्रजा को दर्शन दिए महाकालेश्वर ने....
सवारी में भगवान महाकालेश्वर पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद, घटाटोप मुखोटा, रथ पर जटाशंकर, रुद्रेश्वर स्वरूप व नवम सवारी में चन्द्रशेखर स्वरूप रथ पर विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। भगवान के इन विविध स्वरूपों को देखकर भक्तों ने खुद को निहाल किया।
सशस्त्र पुलिस बल ने दी सलामी....
भगवान की सवारी निकलने के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान चन्द्रमोलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन हुआ। उसके पश्चात शाम 4 बजे भगवान चन्द्रमोलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी गई।
इन मार्गो से गुजरा राजाधिराज का कारवां...
सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंचीं। जहां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया । इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।