
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की धार्मिक नगरी में हर त्यौहार की शुरुआत महाकाल के दरबार से होती है। बुधवार को रक्षाबंधन का पर्व होने पर सबसे पहले तड़के 4 बजे पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को राखी बांधी। इसके बाद सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया।
मंगलवार-बुधवार रात रक्षाबंधन पर्व से पहले बाबा महाकाल के गर्भ ग्रह के पट रात 3 बजे खोले गए। सबसे पहले कोटि तीर्थ कुंड के जल से बाबा का जलाभिषेक किया गया। उसके बाद पंचामृत अभिषेक पूजन और भस्म आरती की गई। हिंदू धर्म के सभी तीज त्योहार की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से होती है जिसके चलते रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत की गई। पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को राखी अर्पित की जिसमें पुजारी परिवार की आठ महिलाओं द्वारा 10 दिनों में तैयार की गई रेशम के धागे, विशेष वस्त्र, स्पंज और आभूषण की मदद से राखी बनाई गई 2 फीट चौड़ी राखी शामिल थे। उसके बाद अन्य राखियां भी बाबा को अर्पित की गई। बाबा महाकाल के दरबार में रक्षाबंधन का उल्लास छा गया। रक्षाबंधन की शुरुआत होने के बाद महाभोग लगाया गया सवा लाख लड्डू राजाधिराज बाबा महाकाल को अर्पित किए गए। 25 क्विंटल बेसन और 20 क्विंटल शुद्ध घी से बनाए लड्डू का भोग 45 लोगों की टीम ने तैयार किया था। इंदौर के बाबू हलवाई ने बताया कि सवा लाख लड्डुओं के लिए 25 क्विंटल बेसन, 25 क्विंटल शक्कर, 20 क्विंटल शुद्ध घी, डेढ़ क्विंटल काजू, डेढ़ क्विंटल किशमिश, 50 किलो इलाइची का उपयोग कर तैयार किए गए। बाबा को महा भोग लगाने के बाद दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को लड्डुओं का प्रसाद के रूप में वितरण कर दिया गया।
दिनभर बाजार में बनी रही रौनक
रक्षाबंधन के पर्व पर बुधवार को भद्राकाल का साया रहा सुबह 10 बजे शुरू हुआ भद्राकाल रात 9 बजे के लगभग समाप्त हुआ। इसके बाद शहर में बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर रक्षा का वचन लिया। भाई बहन के स्नेह के प्रतिक रक्षाबंधन को लेकर सुबह से ही उत्साह दिखाई दे रहा था। बाजार में राखियो की दुकानों पर बहनों की भीड़ दिखाई दे रही थी। बाजार में रक्षा सूत्र के साथ ही पतासे, नारियल, रुमाल और पूजन सामग्री की दुकान भी लगी हुई थी। मिष्ठान भंडारों पर भी भीड़ दिखाई दे रही थी। खरीददारी के साथ भद्राकाल समाप्त होने का इंतजार किया जा रहा था। आज भी रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा जो जन्मअष्टमी तक जारी रहेगा।