अपने अस्तित्व की अंतर्निहित शक्तियों को सहजयोग ध्यान द्वारा अनुभव कर शांति को प्राप्त करें
सहजयोग

मालवा हेराल्ड |वर्तमान समय पर यदि नजर डालें तो सभी ओर उथल-पुथल, उग्रता, बेचैनी ,धर्मांधता व कट्टरता का वातावरण नज़र आता है। इसका कारण है वह सात महारथी (काम ,क्रोध मद, लोभ,मोह, माया ,मत्सर) जिन्होंने अभिमन्यु की भांति हमारे चारों ओर एक चक्रव्यूह रच डाला है। दरअसल इन सातों का हमारे ऊपर हावी होने का कारण हमारे चित्त का बाह्य वस्तुओं में आकर्षण का होना है। हमारे अस्तित्व की शान्ति , सौन्दर्य एवं गरिमा हमारे अन्तर्निहित है । इसका एक महान सागर हमारे अन्दर है । इसे हम बाहर नहीं खोज सकते । इसे हमें अपने अन्तस में खोजना होगा । बाहर फैली हुई वस्तुएं किस प्रकार आपको वह गहन आनन्द प्रदान कर सकती हैं जो आपके अन्तर्निहित है ? सहजयोग संस्थापिका श्री माताजी निर्मला देवी जी ने इसका वर्णन इस प्रकार किया है कि,सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे चारों ओर आसपास का जो वातावरण है उस से जूझने की कोई जरूरत नहीं है। आप अपने से ही अगर ठीक हो जाए अर्थात अंदर से ही आप स्थिर हो जाए तो बाहर जितनी भी चीजें हैं धीरे-धीरे अपने आप स्थिर हो जाएगी। जो कुछ अंदर है वही बाहर है अगर अंदर से अव्यवस्थित है तो बाहर जितना भी झंझावात हो तो उसका जबरदस्त असर होगा, पर आप अंदर से अगर बिल्कुल शांत है तो बाहर जो कुछ भी हो रहा है उसका असर नहीं होगा, उल्टा जो बाहर है वह भी शांत हो जाएगा।
(परम् पूज्य श्री माताजी, निर्मल योग, जुलाई, अगस्त, 1985, सहज ब्रह्मविद्या)
सहजयोग ध्यान द्वारा आत्मजागृति की प्राप्ति होती है तत्पश्चात आप सत्य को जानने व अनुभव करने लगते हैं। जो भी व्यर्थ है वो आपको छू भी नहीं पाता व मनुष्य जीवन की सार्थकता व आनंद आप सहज में ही प्राप्त कर लेते हैं। विश्व भर में लाखों साधकों ने इस अनुभव को प्राप्त किया है व अपने जीवन को सहज सुंदर व आनंदमय बनाया है।
अपने जीवन को चिंता मुक्त बना कर जीवन का आनंद प्राप्त करने के लिए अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर सहजयोग ध्यान का अनुभव प्राप्त करें।
कुंडलिनी जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने www.sahajayoga.org.in और टोल फ्री नम्बर 18002700800 पर सम्पर्क करें। अथवा लर्निंग सहजयोगा यूटयूब चैनल, पर प्रति शनिवार शाम- 06:30 बजे देखकर घर बैठे सहजयोग ध्यान सीख सकते हैं।