आत्मा की खोज में प्रवृत्त करता है सहज योग
सहजयोग

मालवा हेराल्ड |जब भी हमें कोई तकलीफ, आपदा या बीमारी आती है, तब प्रभु से इस जीवन को लेकर हर मनुष्य का एक ही प्रश्न होता है कि व्याधियों में, पीड़ाओं में अपने जीवन में इतनी तकलीफ का सामना क्यों करता है।
तब श्री माताजी निर्मला देवी जी साधक को समझाती है कि मनुष्य की उत्पत्ति जानवरों से हुई है । जिन्हें हम आदिमानव या आधुनिक संसार में वानर के नाम से जानते हैं। जिस प्रकार जानवरों के जीवन में उनका मूलभूत अधिकार खाना इकट्ठा करना, परिवार बढ़ाना यही संघर्ष रहता है उसी तरह मनुष्य के अंदर यह प्रवृत्ति अपने जन्मों-जन्मों के साथ रहती है।
मानव अपनी क्रमागत उन्नति के साथ आगे तो बढ़ रहा है, पर उसका सरोकार उसके जीवन देने वाले उस परमात्मा से दूर गया। उसकी पूरी प्राथमिकता अपने खाना, परिवार प्रयोजन और उसकी आवश्यकता तक रह गयी है।
परंतु अब वक्त बदल गया है। अब सभी को अपनी आत्मा की ओर देखना चाहिए जो पूर्ण रूप से सत्य है। इस सत्य के लिए, हमें अपना आत्मसाक्षात्कार लेना होगा, जो एक गुरु की उपस्थिति में ही पूर्ण होता है। इसलिए इस आत्मसाक्षात्कार को जानना भी मनुष्य की प्रवृत्ति में आना चाहिए । जो जीवन की समस्याओं का पूर्ण समाधान करता है।
सहजयोग ध्यान द्वारा आत्मा को पाने की ऐसी पद्धति है जिसमें सहजता से निःशुल्क आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है। अधिक जानकारी हेतु हमारे हेल्पलाइन नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।