सहजयोग में आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के बाद गणेश तत्व जागृत करने से समस्त कार्य की रुकावटें (बाधा) दूर कर सकते हैं
गणेश रूप होकर वे पर्यायों से परे 'परम तत्व' कहलाते हैं

मालवा हेराल्ड |श्री गणेश तत्व परम तत्व है, अष्टधा प्रकृति के समस्त तत्वों का सृजक तत्व ब्रह्म, ईश्वर, परमात्मा और आत्मा एक दूसरे के पर्याय हैं, गणेश रूप होकर वे पर्यायों से परे 'परम तत्व' कहलाते हैं हम सब उन्नत होना चाहते हैं। हम में से कुछ अपने कैरियर में उन्नत होना चाहते हैं, कुछ संबंधों में उन्नत होना चाहते हैं। अधिकांशत: आर्थिक रूप से उन्नत होना चाहते हैं और यह कि हमारी सुविधाएं ओर व्यवस्थाएं तेजी से बढ़ें। लेकिन हम आंतरिक रूप से कितने ऊपर उठे हैं, यह वास्तविक प्रश्न होना चाहिए हम सभी जानते हैं कि हम दौड़ रहे हैं, क्यों लेकिन हम फिर भी दौड़ते हैं। हम सभी अपने आस-पास की अराजकता से वाकिफ हैं, लेकिन फिर भी हम तनाव में रहते हैं इस तरह की दौड़ में हमें भाग नहीं लेना चाहिए। इसके बजाय, हमें यह सब बंद कर देना चाहिए और आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और समझना चाहिए कि हमारे साथ क्या मामला है कि हम वास्तव में हमारे आस-पास के आशीर्वादों का आनंद नहीं लेते हैं । यह सब कुछ हांसिल करने का एक सूक्ष्म तरीका है और इसे पाना सहजयोग से संभव है। सहजयोग से जुड़ने के पश्चात हमारा वास्तविक उत्थान शुरू होता है हमारी कुंडलिनी का जागरण एक ऐसी अवस्था है, जब हम वास्तव में परमात्मा से जुड़ते हैं। हम संपूर्ण हो जाते हैं और हमारी आत्मा आनंदित होती है और इस तरह हम मनुष्य के रूप में खुशियां बिखेरते हैं । समय अच्छी तरह से व्यतीत होता है। हम प्रेम और करुणा के साथ संवाद करते हैं। हम सहज और उत्साहित रहते हैं और हम श्री माताजी निर्मला देवी के प्रेम का प्रसार करते हैं । गणेश तत्व जागृत होने पर कार्य की समस्त रुकावटें (बाधा ) दूर होती हैं और हम हर कार्य मैं सफल होते हैं
उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।