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बाल्य काल में सीखे गए सहजयोग ध्यान से संभव है बालक का सर्वागीण विकास

बालदिवस विशेष भावी समाज के कर्णधार हैं बच्चे इन्हे संस्कारित करना समाज का दायित्व

बाल्य काल में सीखे गए सहजयोग ध्यान से संभव है बालक का सर्वागीण विकास

मालवा हेराल्ड |बालक संसार का भविष्य है, जीवन कौशल कला से संस्कारित बालक आज की बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया की दशा और दिशा बदल सकते हैं।
आज के अनुशासन हीन बच्चे चिंता का कारण बने हुए हैं।अनेक नकारात्मक गतिविधियों जैसे ड्रग्स, मीडिया के दुष्प्रभाव के चलते पथभ्रष्टए तरुण एवं किशोरों को सहजयोग का सरल ध्यान क्रमशः जीवन कौशल एवं नैतिकता की शिक्षा अनायास ही दे डालता है। छह से अठारह वर्ष की आयु में मिले संस्कार ही उसका भविष्य बुनते हैं।
पाँच साल तक बच्चा घर के सुरक्षा कवच में रहता है। आहिस्ता आहिस्ता उसका परिचय बाहरी दुनिया से होने लगता है। स्कूल , दोस्त और नए बाहर के वातावरण में वह अपना अस्तित्व खोजने लगता है। धीमे धीमे बाल्यावस्था से किशोरवस्था में प्रवेश करता है। इस दौरान उसके अंदर शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक बदलाव आने लगते है। इन बदलावों का सामना करना उसके लिए बहुत ही पेचीदा होता है।
लेकिन सहज योग ध्यान के नियमित अभ्यास से यह पेचीदा जीवन काल बच्चे बिना किसी परेशानी के पार कर सकते हैं। सहजयोग ध्यान संस्थापिका श्री माताजी निर्मला देवीने बतलाया है , कि हमारे शरीर में ह्रदय के पीछे मध्य में एक हड्डी रहती है , जिसे स्टर्नम बोन कहते है। इस हड्डी के भीतर रोग प्रतिकारक पेशियाँ बनती है, जिसे एंटीबॉडीज कहा जाता है। ये एंटीबॉडीज , देवी के सैनिक की तरह रहतीं हैं । बाहर से आने वाली हर आक्रमण के साथ एक योद्धा की तरह लड़ना उनका काम है। बारह वर्ष की उम्र तक ये , स्टर्नम बोन में पैदा होती हैं , बढ़ती हैं , पूरे शरीर में फ़ैल जाती है। और मनुष्य को बाहर से आने वाली की भी आपत्ति का सामना’ करने में सक्षम बनता है।
लेकिन अगर बचपन में डर, सदमा, मानसिक आघात, तनाव या किसी अन्य कारण से व्यक्ति पीड़ित होता है , तो उसके शरीर में एंटीबॉडीज पर्याप्त मात्रा में बनते नहीं है । ऐसे बच्चे में आत्मविश्वास की कमी होती है। फिर स्कूल में कुछ करने की कोशिश करता है , तब उसका आत्मविश्वास डगमगा जाता है। ऐसा व्यक्ति आगे चलकर अनिर्णायक बन जाता है। जीवन के महत्वपूर्ण फैसले लेने में उसे परेशानी होती है । वह जीवन में सही , गलत का निर्णय लेने में असमर्थ रहता है। जिसके वजह से आगे चल कर उसके भविष्य की डोर डगमगा जाती है।
इसलिए कम उम्र में सहज योग ध्यान के रूचि से बच्चों के अंदर आमूलाग्र बदलाव आ सकते है। अच्छी शिक्षा के साथ, आत्मविश्वास, नम्रता , कुशलता , सृजनशीलता जैसे कई गुणों के साथ ऐसे बालक समग्रात्मक नागरिक बनकर विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करने में अपना योगदान दे सकते हैं ।
आज पूरे विश्व में सहजयोग ध्यान शिबिर अनेक पाठशाला , महाविद्यालयो में आयोजित किये जाते हैं। छोटी उम्र के बच्चों से लेकर महाविद्यालयीन छात्रों तक सहज योग ध्यान शिविर निःशुल्क तरीके से सिखाये जाते है। कम उम्र से सहज योग में जुड़ने के कारण कई बच्चों के व्यक्तिमत्व में सकारात्मक बदलाव पाए गए है। ये बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में प्रभावशाली, बुद्धिमान, नम्र , शांतिपूर्ण और आनंदमय हो कर उज्वल भविष्य की और प्रेरित हुए हैं।
इन सभी चीजों की विस्तृत जानकारी के लिए सहज योग से जुड़े। सहज योग पद्धति के आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति द्वारा , अपने अंदर के सूक्ष्म शक्ति का ज्ञान आत्मसात करें । अपने साथ बच्चों को सहज योग में जुड़कर विश्व के भविष्य को उज्वल बनाने में सहयोग दे। इस हेतु वेबस्थली www.sahajayoga.org.in पर जानकारी या आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए विजिट करें।इस हेतु टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

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