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मानसिक स्वास्थ्य के संतुलन का आधार है: सहज योग

सहजयोग

मानसिक स्वास्थ्य के संतुलन का आधार है: सहज योग

आज की दुनिया में , “अध्यात्म” , “ध्यान “, “शांति”, “योगा “, “सेहत और सुदृढ़ता” इन चीजों पर काफी चर्चा रहती है। लोग अपनी तंदुरुस्ती, सेहत को लेकर सतर्क हुए हैं। हर एक घर, परिवार में स्वास्थ्य सम्बंधित उपक्रमों से लोग जुड़े हैं। अपने आप में सकारात्मक बदलाव देखने की चाह हर मानव में है। लेकिन इन सभी चीजों का चयन करने के बाद भी, हम सुकून , शान्ति नहीं महसूस कर पाते। कभी कभी अच्छे बदलाव दिखने लगते हैं , लेकिन वे दृढ़ नहीं रहते हैं। थोड़े समय बाद वापस हम अपने दैनिक व्यवहार में व्यस्त हो जाते हैं। इसके कई कारण हैं। रोज की भागदौड़ , खान-पान का असंतुलन , निद्रा का अभाव , घरेलू और कामकाजी समस्याएं। और बहुत कुछ । इसका प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर सदृश या असदृश तरीके से पड़ता रहता हैं। और फिर अचानक हम किसी बीमारी का शिकार होते हैं। उसके लिए कुछ क्षणिक उपाय करते हैं। और यह सिलसिला सालों साल चलता रहता है। यही कारण है कि आगे चलकर इनमें से कई लोग मेंटल स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंजाइटी, हिस्टीरिया, डिमेंशिया और फोबिया जैसी मानसिक बीमारियों का शिकार हो सकते हैं । मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों की इसी लापरवाही को कम करने और उनमें जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्टूबर को पूरी दुनिया में ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाया जाता है।
भारतीय चिकित्सा शोध परिषद द्वारा साल 2017 में मानसिक रोग को लेकर किए गए एक अध्ययन में चिंताजनक बात सामने आई है। इस अध्ययन के अनुसार भारत में करीब 19.7 करोड़ लोग यानि हर सातवां भारतीय किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। हमारे अंदर जो भी शारीरिक बीमारियां आती हैं , उनमें से अधिकांश बीमारियोंकी जड़े हमारे मानसिक स्वास्थ पर जुड़ी होती हैं।
इसलिए मनुष्य में स्थायी सकारात्मक व्यक्तित्व के लिए “मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन” अति आवश्यक है।
मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करना पेचीदा और कठिन कार्य है। चिकित्सा विज्ञान आज के युग में बहुत विकसित हुआ है। लेकिन मनोदैहिक और मनोविकृतिक विकारों को जड़ से ठीक करना चिकित्सा विज्ञान के लिए आज भी बड़ी चुनौती हैं।
प. पू श्री माताजी निर्मला देवी जी द्वारा संचालित ‘सहज योग ध्यान’ पद्धति ,इन प्रश्नों के सूक्ष्मतम कारणों पर प्रकाश डालकर उन्हें जड़ से सुलझाने में मदद कर सकती है। श्री माताजी ने स्वयं चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन किया। उन्होंने ध्यान और ध्यान से मानवीय शरीर में होने वाले बदलाव पर गहन अभ्यास किया। मानव शरीर को नियंत्रित करनेवाले सूक्ष्म तंत्र , नाड़ियां और चक्रों के ज्ञान का पुनराविष्कार किया। उन्हें यह एहसास हुआ की इस पूरे मानव शरीर को नियंत्रित करने वाले सूक्ष्म तंत्र की नींव एक ‘परिपोषक स्त्रैणशक्ति है , जिसे वेदों और पुराणों में ‘ कुण्डलिनी शक्ति ‘ कहा गया है। उन्होंने देखा की मनुष्य के असंतुलित स्वभाव और शारीरिक , मानसिक और भावनात्मक अतिरेक का सीधा असर उसके सूक्ष्म तंत्र पर पड़ता है। इसकी वजह से मनुष्य का स्वास्थ बिगड़ता है। और यही मानसिक असंतुलन का भी कारण है।
श्री माताजी ने मार्गदर्शन किया कि जब हम हमारे सूक्ष्म तंत्र को पोषित करने वाली कुण्डलिनी शक्ति को , प्रतिदिन ध्यान द्वारा जागृत करते हैं , तब सभी चक्रों को प्लावित करे हुए यह कुण्डलिनी शक्ति हमारे सूक्ष्म तंत्र को सुदृढ़ , स्वच्छ और संतुलित बनाती है। हम एक समग्र व्यक्तित्व पाते हैं।
आईये, इस “ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस “ सप्ताह में , आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति द्वारा अपने अंदर के समस्योंका अवलोकन करें। ध्यान एवं आत्मबोध के द्वारा हमारी मानसिक स्वास्थ्य संतुलित करने का प्रयास करे । इस हेतु वेबस्थली www.sahajayoga.org.in पर जानकारी प्राप्त करने के लिए विजिट करें।आप हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल करके जानकारी प्राप्त कर सकते है।।

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