सहजयोग से बनिए स्वयं के गुरु
र्तमान काल में हम गुरुओं को मुख्यतः दो श्रेणियों में बांट सकते हैं, शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में

मालवा हेराल्ड |पुरातन काल से गुरु शिष्य परंपरा चली आ रही है, जो कि आज भी हमारे देश में कार्यान्वित है। वर्तमान काल में हम गुरुओं को मुख्यतः दो श्रेणियों में बांट सकते हैं, शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में। जहां तक शिक्षा की बात होती है, वहां पर शैक्षणिक गुरुओं का होना अति आवश्यक है, परंतु धर्म के मामले में हमें वर्तमान आध्यात्मिक गुरुओं का पालन करने से पहले हमें अंतर मनन करना चाहिए।
हमारी मिडिया एवं कुछ जागरुक लोगों ने विगत कुछ वर्षों में झूठे आध्यात्मिक गुरुओं का पर्दाफाश किया है। हमें यह समझना चाहिए कि परमात्मा को हम पैसे से प्राप्त नहीं कर सकते। जिस ईश्वरीय शक्ति ने संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की है, उसका पैसों से क्या सरोकार है? जो तथाकथित गुरु हमसे पैसे लेकर हमें परमात्मा को प्राप्त करने की राह पर भटकाते हैं, उनसे हमें दूर हो जाना चाहिए।
इसी दिशा में 100 से भी अधिक देशों में सहजयोग ध्यान पद्धति जो कि श्रीमाताजी निर्मला देवी द्वारा बताई गई है, मानव को स्वयं का गुरु बना देती है। ये पूर्णतः निःशुल्क है। इसमें आदिकाल के सद्गुरुओं द्वारा बताए सूक्ष्म ज्ञान को रोजमर्रा की जिंदगी में भी उतारा जाता है। राजा जनक, अब्राहम, मोजेस, जोरास्टर, लाओत्से, कनफ्यूशियस, मोहम्मद, गुरु नानक, साई नाथ, सोक्रेट्स – चाहे इनके देश अलग हों, परंतु इनके महान व्यक्तित्व ने संपूर्ण विश्व में धर्म का आधार रखा है। ये तो मानवों ने ही इनका विभाजन करके अलग अलग पंथ बनाकर झगड़ा शुरू किया है।
इन महान गुरुओं ने संपूर्ण मानव जाति को प्रेम का धर्म सिखाया। अब आप भी इस नैसर्गिक जीवन नामक तिजोरी में बंद अपने अंदर इन महान गुरुओं को पूर्ण रूप से जागृत कर सकते हैं। इस ताले की चाबी का वर्तमान युग में एक ही नाम है जिसे सहजयोग कहा जाता है।
आप स्नेह पूर्वक आमंत्रित है सहज योग ध्यान केन्द्रों में अपने अंदर के आध्यात्मिक गुरुतत्व को प्राप्त करने हेतु। इसके लिए आप अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।