देवाधिदेव महादेव आत्मा स्वरूप में हमारे हृदय रूपी शिवालय के स्वामी हैं
सहजयोग द्वारा आत्मा स्वरूप शिव का साक्षात् संभव है।

मालवा हेराल्ड |इस संसार के समस्त प्राणी की जुबान से हम अक्सर सुनते हैं कि "आत्मा ही परमात्मा है" लेकिन क्या हम मनुष्यों ने कभी इस आत्मा के चैतन्य को महसूस करने की कोशिश की ? क्या हमने आत्मा के मार्ग से परमात्मा तक पहुंचने की कोशिश की ? नहीं सिर्फ बोला हमने कभी उस तक पहुचने की, समझने की , उसको पाने की कोशिश नहीं की , बस बोलते-बोलते जिंदगी गुजर गयी । पीढ़ी दर पीढ़ी यही बात की "आत्मा ही परमात्मा है" ये सच है कि आत्मा ही परमात्मा है । परमात्मा हर एक प्राणी में, जीव में ,जंतु में , विराजमान है जो इस धरती पर जीवित है ।जब आत्मा किसी के शरीर को छोड़ती है तो वो शव बन जाता है ।यही प्रमाण है कि हर इंसान के अंदर आत्मा रूपी परमात्मा विद्यमान है स्वयं शिव हमारे अंदर आत्मा बनकर बैठे है। जो हमें सही गलत समझाते है l हमे संसार के गंदे विचारों से कर्मों से बचाते है। व्यक्ति कितना भी गलत करता हो गलत राह पर हो लेकिन जब वो अकेले में बैठता है तो वहीं आत्मा उसे सही गलत का अहसास कराती है। आत्मा की आवाज विचार कभी गलत नहीं होते क्योंकि " आत्मा ही परमात्मा है" शिव का तो स्वभाव ही विष पीने का है इसलिए वो इस सृष्टि के हर प्राणी जीव जंतु में आत्मा बनकर बैठा है जिससे जीवों की रक्षा कर सके। जब हम सहजयोग धारण करते हैं तो पहला परिचय हमारा आत्मा से होता है जो चैतन्य बनकर हमारे पूरे शरीर में बहता है। श्री माता जी ने अपना सहस्रार खोलकर इस संसार के समस्त मानव जाति का कल्याण किया है जिन्होंने हमें परमात्मा से एकाकारिता के गुण सिखाए ये समझाया कि आत्मा ही परमात्मा है । हर सहजी सहजयोग में परमात्मा के परमचैतन्य को महसूस कर सकता है ।
"मनुष्य में, उसके हृदय में, प्रत्येक मनुष्य में, सभी जीवों के हृदय में, जो प्रतिबिंबित है वह आत्मा है, वो परमात्मा का, ईश्वर का प्रतिबिंब है l जिसके बारे में मैंने आपको बताया है, वह प्रतिबिंबित है। और एक लौ की झिलमिलाहट की तरह, आपके अंगूठे की तरह, यह आपके दिल में है।
वास्तव में आप, आपकी सारी वृद्धि, सृजन, सब कुछ, आपके हृदय द्वारा प्रबंधित किया जाता है – आपके मस्तिष्क द्वारा नहीं।
( दिल्ली 1973-11-24 परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी जी साधकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए )
अपनी आत्मा के प्रकाश को प्राप्त कर चलो आओ अपने जीवन से हर प्रकार के अन्धकार को भगाते हैं। सहजयोग ध्यान करते हैं। वेबसाइट www.sahajayoga.org.in , टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 और यूट्यूब चैनल 'लर्निंग सहजयोगा आपके लिए सहायक होगा।