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या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

(देवी के कुंडलिनी शक्ति स्वरूप को जागृत करने का विशेष पर्व है - नवरात्रि)

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

सहस्त्रार चक्र की व्याख्या श्री माताजी निर्मला देवी जी ने अपनी अमृतवाणी में इस प्रकार की है कि,

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