हवा और पानी की तरह ही ईश्वर सबको सुलभ हैं
इसीलिए निशुल्क है सहजयोग

मालवा हेराल्ड | ईश्वर कण कण में व्याप्त है और वे सभी को सहजता से सुलभ हैं उनकी यह सर्व सुलभता ही उनके ईश्वर होने का प्रमाण है। ईश्वरीय तत्व शर्तों में नहीं बंधता ।जैसे सूर्य सबके लिए एक ही रोशनी देता है हवा सबको एक सा जीवन देती है उसी तरह ईश्वर सबके लिए समान आशीष देते है। परंतु यह सब योग के बिना संभव नहीं है आत्मा के परमात्मा से जुड़ाव के बिना ईश्वर मानव को अनुभव नहीं होता।
एक बात बहुत जरूरी है कि परमात्मा और आत्मा की उपलब्धि गर एक दो लोगों को ही हो, चुनिंदा लोगों को ही हो और सर्व सामान्य इससे अगर अछूते रह जायें तो इसका कोई अर्थ ही नहीं निकलता है, परमात्मा का भी कोई अर्थ नहीं लगने वाला है, ना इस संसार का कोई अर्थ निकलने वाला है, इस सर्जना का भी कोई अर्थ नहीं निकलने वाला है, ये उपलब्धि सर्व सामान्य को होनी ही चाहिए।
ये परमात्मा ने हमारे अंदर जीवन्त यंत्र बनाया है और जिसे "सुरति" कहते हैं वही कुण्डलिनी है, आखिर हम जो मानव स्वरूप हैं वो किसी न किसी चीज के बूते पर चल रहे हैं ना, इस "आँख" को देखिये, ये कितनी कमाल की चीज है, सारे शरीर का चलन कितना प्रभावशाली और कितना सुन्दर है, सारी सृष्टि की रचना कितनी खूबी से की हुई है, ये सारी चीजें, कोई न कोई ऐसी शक्तियां हैं जो गुप्त हैं, वो गुप्त इसलिए हैं कि हमारा जो जड़ चित्त है वो उसे नहीं जान पाती हैं, इसके लिए सूक्ष्मता आनी चाहिए, ये सूक्ष्मता पाना ही सहजयोग का लक्ष्य है।
बोध आत्मा को जानने के बाद आता है इसलिए आत्मा को पहले जाना जायेगा, उसके बाद सारी बातें समझ में आ जायेंगी।
सहजयोग में आने के बाद अपने को जानने के बाद अपने में उतरना पड़ता है और पूरी शक्ति के साथ उतरना पड़ता है। परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी द्वारा कथित यह प्रवचन हमें प्रेरणा देता है कि यह निशुल्क सर्व सुलभ ईश्वर तत्व केवल हमारा समर्पण मांगता है ध्यान के निशुल्क अनुभव सिद्ध प्रयोग हेतु सहज योग की वेबस्थली www.sahajayoga.org.in विजिट करें अथवा टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 पर संपर्क करें।