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स्वाधिष्ठान चक्र के संतुलन द्वारा अनेक असाध्य रोगों से मुक्ति संभव है

सहजयोग ध्यान द्वारा स्वस्थ जीवन शैली पाना अत्यंत सहज है।

स्वाधिष्ठान चक्र के संतुलन द्वारा अनेक असाध्य रोगों से मुक्ति संभव है

मालवा हेराल्ड | इस आपाधापी भरे संसार में वर्तमान परिस्थितियों में अक्सर हम हमें यह सुनने को मिलता रहता है कि बहुत कम उम्र में ही किसी व्यक्ति की किडनी खराब हो गई, लीवर की प्रॉब्लम हो गई, डायबिटीज हो गई अथवा हृदय से संबंधित रोग हो गए हैं इसका मुख्य कारण क्या है? दैनिक चर्या में तनाव की स्थिति तो है ही परंतु यह स्थिति क्यों निर्मित होती है प्रश्न यह है। हम आयुर्वेद में योग की दृष्टि से देखें तो इसका सीधा संबंध स्वाधिष्ठान चक्र से होता है।
"स्वाधिष्ठान चक्र हमारे शरीर में स्थित द्वितीय चक्र है जिस चक्र के कारण सारी सृष्टि की निर्मिति हुई , आकाश के ग्रह , साrरे तारे जिस चक्र के कारण इस संसार में आए उस चक्र का स्थान हमारे भी पेट के अन्दर में है । ये चक्र नाभि चक्र से निकल कर उसके चारो तरफ होकर हरेक ऐंगल में चलता है , आगे - पीछे हो सकता है , जैसे कमल की डंठल होती है , उसी तरह वो लचीला होता है । ....... इस चक्र के ऊपर श्री ब्रह्मदेव का स्थान है और उनकी पत्नी पत्नी तो नहीं कहना चाहिये , क्योंकि वे कुमारिका ही रहती हैं सदा , उनकी सहचरी जो हैं वो सरस्वती हैं , या युं कहना चाहिये कि उनकी शक्ति जो हैं वो सरस्वती हैं । इस चक्र का मुख्य कार्य यह होता है कि पेट में जो मेद है , जो फैट है उसको मेंदू माने ..... जिसे आप ब्रेन कहते हैं , उस ब्रेन के सेल का replacement करना । यहाँ का जो फैट है उसको evolve करके उसकी उत्क्रान्ति करके इस योग्य करना कि वह अपने ब्रेन का सेल बन जाए । जब हम बहुत विचार करते हैं , जब हम बहुत प्लानिंग करते हैं , जब हम बहुत सोचते हैं , जब हम रजोगुण का इस्तेमाल करते हैं , तब ये कार्य बहुत वेग से होता है , इसमें गति आ जाती है । ... जब इसकी गति बहुत ज्यादा जरूरत से ज़्यादा बढ़ जाती है तब इस चक्र के दूसरे जो कार्य हैं जिसे हम कह सकते हैं , हमारा लिवर , हमारा स्प्लीन , हमारा पैनक्रियाज , हमारी किडनी , हमारा यूटेरस इन सब चीज़ों को यह चक्र देखता है तो उसमें कमी आ जाती है और कभी - कभी रुकावट सी आ जाती है । इसलिये जो लोग दिमागी कार्य ज़्यादा करते हैं उन्हीं को डायबेटीज़ की बीमारी होती हैं , उन्हीं को हार्ट अटैक आता है क्योंकि राइट साइड बहुत चलाने से लेफ्ट साइड जो है वो उसको बैलंस देने की कोशिश करता है ।" ( प.पू. श्री माताजी ,30/1/1978)
इन समस्याओं का समाधान आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पूर्णतया संभव नहीं है। परंतु हमारी भारतीय योग पद्धति में यह संभव है। सहजयोग में श्री माताजी निर्मला देवी जी ने इन्हीं जटिल पद्धतियों को सरल रूप में सहजयोग में कुंडलिनी जागरण द्वारा प्रदान कर मानव को आशीर्वादित किया है। सहजयोग के माध्यम से अनेक असाध्य रोगों को पूर्ण रूप से उपचारित किया गया है।
सहजयोग ध्यान अनुभव का विज्ञान है अतः इस अनुभव को एक अवसर अवश्य प्रदान करें। यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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