परमात्मा की ब्रह्मचैतन्य शक्ति ही सृष्टि के सम्पूर्ण कार्यों का संचालन करती है
जो कुछ असत्य है उसे छोड़ना है, कभी कभी असत्य का छोड़ना बड़ा कठिन हो जाता है क्योंकि बहुत दिन तक हम किसी असत्य के साथ जीते रहते हैं

मालवा हेराल्ड |सहजयोग एक सत्य स्वरूप है और हम लोग सत्यनिष्ठ हैं, जो कुछ असत्य है उसे छोड़ना है, कभी कभी असत्य का छोड़ना बड़ा कठिन हो जाता है क्योंकि बहुत दिन तक हम किसी असत्य के साथ जीते रहते हैं, फिर असत्य को छोड़ना बड़ा मुश्किल है, हमें एक निश्चय कर लेना चाहिए कि जो भी सत्य होगा उसे ही हम स्वीकार करेंगे, इस निश्चय से ही आपको आश्चर्य होगा कि कुण्डलिनी स्वयं जो कि जागृत हो गयी है, इस कार्य को करेगी ।
इस परम चैतन्य ने सारी सृष्टि की रचना की है, आज उसी परम चैतन्य से हम एकाकारिता प्राप्त कर चुके हैं और उस परम चैतन्य का ही ये कार्य है कि वो हमारे सारे कार्य करे, सो हम कुछ भी नहीं कर रहे हैं, हम तो अकर्म में खड़े हैं, जब हमारा संबंध परमात्मा की सर्व व्यापक शक्ति यानि परम चैतन्य से हो जाता है तो हमें कोई फिक्र करने की जरूरत नहीं है, सारी चिन्ता वही करते हैं | सहजयोग में वही लोग आयेंगे जो परमात्मा को खोजते हैं, जो ब्रह्म को सोचते हैं और जो इस ओर ध्यान देते हैं कि हमें परम को प्राप्त करना है और दुनियायी चीजों में क्या रखा है। परम चैतन्य ही सारे कार्य करते हैं, उसको स्वीकार करना चाहिए कि परम चैतन्य के सभी निर्णय, सभी कार्य हमारे हित में ही है।
सहजयोग अत्यंत सहज व पूर्णतया नि:शुल्क ध्यान पद्धति है। उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।