परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए कुंडलिनी जागरण ही एकमात्र सरल तरीका है
सहजयोग

मालवा हेराल्ड |हमारे भीतर एक शक्ति है जो विकासवादी शक्ति है, मध्य में है, और यह वह शक्ति है जिसे हम महालक्ष्मी की शक्ति कहते हैं, यह वह शक्ति है जो हमारे अपने चरित्र का आधार हैं, जिसके द्वारा हम मनुष्य बनते हैं। इस शक्ति के माध्यम से हम उत्थान शुरू करने के योग्य हो जाते हैं, क्योंकि यह एक शक्ति है जो हमें संतुलन देती है। यह हमारे रीढ़ के अंदर स्थित कुंडलिनी शक्ति है । यह हमारे अंदर एक जीवित प्रक्रिया है और यह प्रक्रिया स्वतःस्फूर्त है। यह शक्ति आपके साथ ही पैदा हुई है । इसलिए हम कहते हैं “सहज” “सह” का अर्थ है “साथ” और “ज” का अर्थ है “जन्म”। यह आपके साथ पैदा हुआ है, यह स्वतःस्फूर्त है। जैसे तुम्हारी श्वास तुम्हारे साथ पैदा होती है, जैसे तुम्हारी धड़कन तुम्हारे साथ पैदा होती है, जैसे हर चीज जो तुम्हारे साथ पैदा होती है, तुम मान लेते हो, वह अस्तित्व में है। उसी तरह यह कुंडलिनी आपके साथ पैदा होती है। और यह जागृति आपका जन्मसिद्ध अधिकार भी है, एक मनुष्य के रूप में आपको यह जागृति अपने भीतर रखने का अधिकार है और आपको इसे प्राप्त करना चाहिए और आपको इसकी तलाश करनी चाहिए। कुंडलिनी शक्ति ही “ईश्वर की शक्ति है और यही प्रेम की शक्ति है। यही परम सत्य है ।
यह सर्वव्यापी शक्ति द्वारा की गई एक जीवंत प्रक्रिया है, जो ईश्वर का प्रेम है, और जो इसे सक्रिय करती है और इसे कार्यान्वित करती है और प्राकृतिक बनाती है जिसे आप अपनी मानसिक प्रक्रिया से नहीं समझ सकते हैं, न ही आप इसे कर सकते हैं। आप एक फूल को फल में नहीं बदल सकते। आप संपूर्ण के अभिन्न अंग बन जाते हैं। और जब आप वह बन जाते हैं, तो आप बस उस संपूर्ण के एक भाग के रूप में, उसकी सारी शक्तियों के साथ कार्यान्वित होते हैं। और ऐसा ही आप सभी के साथ होना चाहिए जो साधक हैं। जब कुण्डलिनी उठती है आपका चित्त अंदर खींच लेती है चाहे चित्त चरम पर ही क्यों न हो, अंदर ही खींच लिया जाता है। यह घटित होता है।
आप इसे सिर के ऊपर महसूस करने लगते हैं। और जब यह उस क्षेत्र को तोड़ता है, तो फॉन्टानेल हड्डी क्षेत्र, जिसे “तालु” कहा जाता है, आपको बस अपने सिर से ठंडी हवा बाहर निकलने का आभास होता है। जब कुंडलिनी आपके फॉन्टानेल हड्डी क्षेत्र (तालू)से ऊपर उठती है तो आपको सबसे पहला आशीर्वाद अच्छे स्वास्थ्य का मिलता है। आप शारीरिक और मानसिक रूप से फिट महसूस करते हैं। आपका गलत व्यवहार गायब हो जाता है। अधिकतर हम कुछ आदतों को अपना लेते हैं; हम जो भी आदतें अपनाते हैं, उसका कारण हमारा जीवन में ऊब जाते हैं या तंग आ जाना, या बहुत दुखी हो जाना है या हम किसी बात से परेशान होते हैं या हमें कोई धक्का लगा होता हैं। परिस्थितियों में, हम इसे अपना लेते हैं। लेकिन कुंडलिनी जागृति से आप व्यवस्थित महसूस करते हैं, आप आनंदित महसूस करते हैं, आप खुश महसूस करते हैं, आप दुनिया के शीर्ष पर महसूस करते हैं। क्युकी आप अब मुख्य स्त्रोत्र से जुड़ चुके है और हर समय आपके अंदर से ऊर्जा प्रवाहित हो रही है, तो आपको कोई चिंता नहीं है, और बस आप इन सभी चीजों पर काबू पा लेते हैं। यह न्यूनतम है जो होना चाहिए ।
आप को आत्मीय आनंद की प्राप्ति होती है, एक अलग कभी न खत्म होनेवाली खुशी का एहसास होता है। आपको किसी चीज से भय नहीं लगता । जब तक आप उस अवस्था को प्राप्त नहीं कर लेते, आपके सारे गुरु, आपके सारे धन का कोई मूल्य नहीं है, कुछ भी नहीं है। आप भी कुंडलिनी जागृति का अनुभव प्राप्त करना चाहते है तो आप हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।