सहजयोग से जानें पंच तत्वों के महत्व व कार्य प्रणाली को
महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत तुकाराम महाराज कहते हैं,
ओवाळा, ओवाळा माझ्या सद्गुरु राणा | माझ्या सावळ्या राणा, पाचाहि तत्वाच्या ज्योति लावल्या ध्यानो, निराकार वस्तु कैसी आकारा आली, सर्वा घटी या प्रकट माऊली माझी सद्गुरु ||

मालवा हेराल्ड |उपरोक्त वर्णित तुकाराम महाराज द्वारा लिखित आरती में सहजयोग के रहस्य का वर्णन किया गया है। हमारा सनातन ज्ञान कहता है कि हम सभी के ह्रदय में आत्माराम स्थित है और उस आत्माराम को सद्गुरु की कृपा से पाया जा सकता है l तुकाराम महाराज कहते हैं कि हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है, इसमें मूलाधारचक्र पृथ्वी तत्व से, स्वाधिष्ठान चक्र अग्नि तत्व से नाभिचक्र जल तत्व से, हृदय चक्र वायु तत्व से, और विशुद्धि चक्र आकाश तत्व से बना हुआ है l आत्मस्वरूप कैसा है ? इसका उत्तर देते हुए तुकाराम महाराज कहते हैं वह तो निर्गुण है - निराकार है l
पंरतु उस परब्रम्ह परमेश्वर ने हम पर कृपा कर हमे ये मानव शरीर दिया जिसका उपयोग कर हम हमारी आत्मा को पा सकते हैं। इस आत्मस्वरूप को प्राप्त करने के लिए आपको 'सप्त सागर को पार करना पडेगा। ये सप्त सागर क्या है ?
यह हमारी सुषुम्ना नाडी पर स्थित सात चक्र हैं जिसे हम योगा की भाषा मे मूलाधार, स्वाधिष्ठान आदि चक्र कहते हैं और साईन्स की भाषा मे एनर्जी सेंटर कहते है l इन सप्त सागरों को पार करते ही साधक को आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हो जाता है l
परम पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी कहती हैं कि सहजयोग कोई नयी चीज नहीं है ये पुरातन है सनातन है सभी धर्मग्रंथों में वर्णित है। वे कहते हैं कि हमारे आनन्द का स्त्रोत आत्मा है। और अगर आपने इसको पाया है तो वह आपके रग-रग से बहना चाहिये। हमारे हर व्यवहार में बहना चाहिये। आनन्द का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता l आनन्द तो आनन्द है , ना प्रसन्नता है और ना ही अप्रसन्नता है, ये तो मात्र आनन्द है। आनन्द ही आपके मस्तिष्क की व्यर्थ की चीजों से हटा सकता है l
इस आनंद को प्राप्त करने के लिए आज ही सहजयोग ध्यान सीखें यह नि:शुल्क है l उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।