सहज योग ध्यान के द्वारा अंतस में जागा प्रकाश भय और भ्रम को दूर करता है
मनुष्य के कल्याण के लिए आवश्यक है भीतर की जागृति का प्रकाश

मालवा हेराल्ड | सहज योग ध्यान के द्वारा चेतना की जागृति वास्तव में आत्मा के प्रकाश से जुड़ी है जागरण के द्वारा आनंद का अमृत जीवन को सींचता है यही आनंद के संस्कारों को पोषित करता है। परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी प्रणित सहज योग की ध्यान पद्धति आत्मा के साक्षात्कार की अनुभव सिद्धता देती है। वेदों में इसे ही तमसो मा ज्योतिर्गमय कहा गया, भगवान बुद्ध ने अपने दीपक स्वयम् बनने का संदेश आत्मा की जागृति को लेकर ही दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय सहज योग ट्रस्ट नई दिल्ली एवं सहज योग प्रतिष्ठान पुणे सहित विश्व भर के सहस्रों ध्यान केन्द्रों पर आत्मसाक्षात्कार कराया जाता है। सहजयोग ध्यान का निशुल्क अभ्यास वेबस्थली www.sahajayoga.org.in पर प्रतिदिन सुबह शाम प्रसारित किया जा रहा है जिससे 90 देशों के लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
अंतस का प्रकाश संकल्पों को जगाता है जिससे दुर्दम्य चुनौतियों का भी मनुष्य सहज ही सामना कर पाता है और विजयी होता है। संसार की अनेक सभ्यताओं का प्रकाश के प्रति समर्पण इसी आत्मा के प्रकाश की चाह में होता है और इसी का प्रतीक है जगमगाता दीपक । संसार की अनेक सभ्यताएं प्रकाश की आराधना श्रद्धा और समर्पण से करती रही हैं क्योंकि प्रकाश ही परम शक्ति का प्रतीक है जो जीवन को नश्वरता से अमरत्व की ओर ले जाने का प्रेरक है केवल ज्योतिपुंज से प्रसारित होती किरणें ही प्रकाश नहीं है सूर्य और दीपक के अतिरिक्त अपने भीतर के जागृति का प्रकाश, चेतना का प्रकाश मनुष्य के लिए आवश्यक है उस के कल्याण के लिए आवश्यक है।