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ध्यान करने से किसी भी समस्या का तुरंत समाधान होता है - सहजयोग

परम पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी साधकों को बताती हैं कि

ध्यान करने से किसी भी समस्या का तुरंत समाधान होता है - सहजयोग

मालवा हेराल्ड |मार्कण्डेय जी ने देवी का वर्णन करते हुए कहा है कि - जयन्ती, मंगला काली, भद्रकाली, कपालिनी , दुर्गा, क्षमा, शिवा,धात्री,स्वाहा स्वधा नमोस्तुते, इन नामों से प्रसिद्ध जगदम्बिके आपको मेरा नमस्कार हैं। देवि चामुण्डे आपकी जय हो l सम्पूर्ण प्राणियों की पीड़ा हरने वाली देवी आपकी जय हो। सबमें व्याप्त रहने वाली देवी आपकी जय हो, कालरात्रि आपको नमस्कार हो। महानतम से भी महानतम ज्ञान से यह जानना है कि 'परमात्मा ही प्रेम है, प्रेम का अभिप्राय ये है कि आप परस्पर एक दूसरे को इस प्रकार प्रेम करते है कि आप केवल देते ही देते हैं, किसी चीज़ की आशा नहीं करते। सदैव देते ही रहे क्योंकि देने का आनंद सर्वोच्च है |
आदिशक्ति के प्रेम की शक्ति इतनी व्यापक है कि उसके समक्ष सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। श्री माताजी के अनुसार,
किसी भी चीज का सामना करते हुऐ आत्म-साक्षात्कारी व्यक्ति का दृष्टिकोण बिल्कुल भिन्न होता है। जैसे मेरे सम्मुख यदि कोई समस्या आ जाए तो मैं तुरंत ध्यान में चली जाती हूँ और समस्या का समाधान हो जाता है, क्योंकि यह मेरी शक्ति है। इसी प्रकार से आपको भी यदि कोई समस्या हो तो यदि आप ध्यान में चले जाएंगे तो मेरी शक्ति आपकी समस्या का समाधान कर देगी। इसका अर्थ ये है कि ध्यान अवस्था में आप मेरे सम्मुख समर्पित हो जाते है, तब समस्या समाधान मेरा कार्य हो जाता है। परन्तु यदि आप मानसिक रूप से योजनायें बनाकर समस्याओं का समाधान करना चाहेंगे तब आप शिकजें में फँस जायेंगे। अतः सबसे अच्छा हैं - उस समस्या के साथ ध्यान में चले जाएं और आपको समस्या पर विजय प्राप्त होगी।
मुझे आपसे बताना है कि ध्यान- अवस्था में ही आप भली भांति उन्नत हो सकते है, किसी भी अन्य अवस्था मै आप उन्नत नही हो सकते। यह अवस्था वृक्ष के लिये धूप-सम है। आपको ध्यान में होना होगा, निर्विचारिता में रहना होगा। सर्वोत्तम बात तो यह है कि आप समर्पण कर दे और समर्पण करना अपेक्षाकृत सुगम हैं। हर समय आप मुझे अपने हृदय में स्थापित लें यह साधारणतम उपाय है। यह एक प्रकार से निर्लिप्त प्रेम है। आपको लगेगा कि आप अत्यन्त शान्त, आशीर्वादित और सन्तुष्ट हैं। तब आपको किसी चीज़ की आवश्यकता नही होती। यह अवस्था व्यक्ति को स्थापित करनी चाहिए। ये अवस्था प्राप्त करना अत्यन्त सुगम है क्योंकि मैं साक्षात् आपके साथ हूँ।

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