मिथ्या के भ्रम से बच कर सत्य को अपनाना ही है, सहजयोग ध्यान
आत्मसाक्षात्कार द्वारा सांसारिक मिथ्या भ्रम व सत्य की पहचान कराता है सहज योग

मालवा हेराल्ड | संसार में अनेक मिथ्या भ्रामकताएँ फैली हैं जो आध्यात्मिक सत्य की ओर बढ़ते मानव की राह का स्वसे बड़ा रोड़ा हैं। सहजयोग की सहज ध्यान पद्धति बड़ी ही सरलता से ध्यानस्थ योगी को सत्य का स्पर्श कराती है।
सहजयोग ध्यान पद्धति की प्रणेता परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी के प्रवचन से मार्गदर्शन मिलता है कि योग पाने की तपस्या में अनेक पड़ाव आते हैं। सहजयोग की दृष्टि से भी देखें। बड़े आश्चर्य की बात है कि मानव, जितना कुछ मिथ्या है। उसे कितने जोर से पकड़ लेता है और सत्य को पकड़ने में कितना कतराता है, जितनी जल्दी मिथ्या हमारे अंदर से मिटता जाता है उतने ही जल्दी हम लोग चित्त को हल्का कर लेते हैं, सहजयोग में यही चित्त परमेश्वर से जाकर मिलता है, यही चित्त वो सर्वव्यापी परमेश्वर के प्रकाश में जाकर मिल जाता है, सहजयोगी की पहचान एक ही है कि आप कितने आनंद में उतरे हैं, आप कितने शान्ति में उतरे हैं, आप कितने प्रेम में उतरे हैं, मिथ्या में रहने वाले लोग सहजयोग को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। *जैसे राखहुँ तैसे ही रहहूँ,* सहजयोगी अगर इतना करलें कि जैसे भी रखो मंजूर है हमें, हरेक चीज में, परिस्थिति में आनंद आ सकता है।
सहज योग की अनुभव सिद्ध ध्यान पद्धति को सीखने के लिए सहज योग की वेबस्थली www.sahajayoga.org.in पर विजिट करें । यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर संपर्क करें।