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प्रातःकाल ध्यान में स्थित होना, अत्यंत महत्वपूर्ण होता है - श्री माताजी निर्मला देवी जी

ब्रह्म मुहूर्त में सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है।

प्रातःकाल ध्यान में स्थित होना, अत्यंत महत्वपूर्ण होता है - श्री माताजी निर्मला देवी जी

मालवा हेराल्ड |सहजयोग में आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति के पश्चात कुंडलिनी जागरण द्वारा हाथों में चैतन्य लहरियों के अनुभव के साथ नियमित ध्यान आवश्यक है। परंतु ध्यान कैसे होना चाहिए इसका वर्णन भी श्री माताजी ने अपनी अमृतवाणी में किया है एक छोटा सा अंश इस प्रकार है "सवेरे उठकर के सहज योगी को चाहिए कि वह ध्यान करें यह आदत लगाने की बात है। सवेरे के टाइम में एक तरह से ग्रहण करने की क्षमता ज्यादा होती है मनुष्य में l
सहजयोग संस्थापिका परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी प्रवचन में जानकारी देती है कि–
*सहजयोग में आपकी वृत्ति समाधानी हो जाती हैं, ये पहचान है, आप समाधान को प्राप्त कर लेते हैं, आप अपने से भी समाधान पाते हैं और आपके अंदर समग्रता आ जाती है, "जैसे राखऊं तैसे ही रहूँ" फिर वो आत्मा का अंश होता है शरीर का नहीं।*
*किसी पेड़ में कब फल लगेंगे, कुछ कह तो सकते नहीं और सब पेड़ों में एक साथ फल नहीं लगते हैं, पहले तो निर्विचार समाधि की बात की है, दूसरी जो स्थिति है वो निर्विकल्प समाधि है, फिर आप समय से परे ही हो जाते हैं। 22 मार्च 1993 ,दिल्ली में दिए प्रवचन से साभार।
सहजयोग का अनुभव आधारित ध्यान मानव को ईश्वर के संपूर्ण सत्य से एकाकार कर देता है।
इस अवस्था में पहुंचने के लिए नम्रता सबसे पहली आवश्यकता है। यही विश्व शांति की स्थापना करती है।
सहजायोगा डॉट ओआरजी डॉटइन या टोल फ्री नंबर 18002700800 पर से अनुभव आधारित आत्म साक्षात्कार प्राप्त किया जा सकता है।

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