सद्गुरू एक माध्यम होता है भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति का
सहजयोग में व्यक्ति स्वयं ही गुरु के समान आत्मसाक्षात्कारी हो जाता है।

मालवा हेराल्ड |वर्तमान समय बैचैनी, तनाव, असंतोष व जिज्ञासा का समय है। इसके कारण हमारे भीतर व बाहर असंतुलन की स्थिति बन जाती है। असंतुलन की यह अवस्था अनेक समस्याओं को जन्म देती है। ऐसे में हम समाधान के लिए अलग अलग मार्ग खोजते हैं और कई बार गलत गुरुओं अथवा पाखंडियों के जाल में फंसे जाया करते हैं।
गुरु एक माध्यम होता है हमारी आत्मा की जागृति व आध्यात्मिक व चारित्रिक उत्थान का। कबीरदास जी तो गुरु की महिमा को गोविंद से भी बढ़कर बताते हैं।
"गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागूं पाय,
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो मिलाय"
एक सद्गुरू परमात्मा का ही एक स्वरूप होता है परन्तु आवश्यक है कि वह आत्मसाक्षात्कारी हो।
श्री माताजी ने एक आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति की व्याख्या इस प्रकार की है कि,
"आत्मा का प्रकाश जब अंदर आ जाता है तो मनुष्य के चेहरे पर एक दीप्ति आ जाती है, उसके चरित्र में एक विशेषता आ जाती है, वो एक आदर्शवादी हो जाता है।"
एक आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति ही सद्गुरु हो सकता है और एक सद्गुरु ही आपकी समस्याओं का समाधान कर सकता है क्योंकि वह आपको आत्मज्ञानी बना देते हैं और आत्मा के प्रकाश में आप साक्षी स्वरूप हो जाते हैं। परंतु सत्य और झूठ को परखने के लिए आत्मज्ञान का होना आवश्यक है इसके लिए आपको पहले अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त करना चाहिए। सहजयोग में श्री माताजी की कृपा में कुंडलिनी जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करना इस युग में अत्यंत ही सहज हो गया है।
कुंडलिनी जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने हेतु www.sahajayoga.org.in और टोल फ्री नम्बर 18002700800 पर सम्पर्क करें।