सहजयोग द्वारा जाने विवेक शक्ति क्या है
आन्तरिक प्रेरणा श्री गणेश की शक्ति की अभिव्यक्ति से ही प्राप्त की जा सकती है। वे ही विवेक प्रदायक है। विवेक द्वारा ही आप समाधान ढूंढते है - ऐसे समाधान जो शांति, संतोष एवं सुखमय हो। आपकी गलतियों के लिये श्री गणेश आपकी भर्त्सना भी करते है।

मालवा हेराल्ड आपको त्याग का दिखावा नही करना चाहिए, सचमुच में आप को त्यागी बनना है।सन्यास अपनाने का अर्थ है कष्ट उठाना। परन्तु यदि आप अन्दर से संन्यासी है तो छोटी - 2 कमियों का आप पर कोई प्रभाव नही पड़ता। आपका विवेक ही आपका मार्गदर्शन करेगा। विवेक आपको मर्यादा सिखाएगा क्योंकि आप यहाँ उत्थान प्राप्त करने के लिये आध्यात्मिकता के साम्राज्य में एक विशेष पद प्राप्त करने के लिये आए है । "कोई कार्य करने से पहले आपको चाहिए कि विवेकपूर्ण दृष्टि से यह देखे कि ऐसा करना क्या विवेकपूर्व है ? इस अभ्यास से आपका क्रोध, कामुकता, दोषभाव बहुत ही कम हो जायेंगे। श्री गणेश ओंकार है। श्री गणेश के कारण ही हम मंगलमय हैं। शान्ति एवम प्रेम बड़ाने वाले लोगों को ही श्री गणेश आशीर्वादित् करते है। आपका चित्त अन्दर होना चाहिए बाहर नहीं। और आपको प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए। ये सब विधियां आपको विवेक एवं संवेदन शीलता होने में सहायता करती है । पारिवारिक जीवन के आशीष का आनन्द यदि आप नही ले सकते तो किसी भी चीज़ का आनन्द आप नही ले सकते। पति-पत्नि का गहन संबंध केवल श्री गणेश की समस्या के कारण टूटता है।
गणेश तत्व यदि ठीक है तो पूर्ण एकाकारिता और पूर्ण सूझबूझ पति-पत्नि के बीच होती है,संबंधो का बिगाड ये बताता है कि श्री गणेश तत्व में निश्चित रूप से कुछ खराबी है। गणेश अंनत के बालक है अर्थात पूर्ण पवित्रता। दाम्पत्य जीवन में भी पूर्ण अबोध, धर्म, मर्यादा एवं पवित्रता द्वारा सम्बन्धों को जीवन्त एवं सुखमय रखा जा सकता है। पशु अबोध है परन्तु मानव स्वतन्त्र है। मानव को श्री गणेश की तरह अबोध व पवित्र बनना चाहिए। अबोधिता ही सारे कार्य क्रियान्वित करेंगी वही आपका पथ प्रदर्शक बनेगी। अबोधिता कुछ नहीं चाहती, इसलिए अपना गणेश तत्व ठीक करें ,तब दूसरों की ओर देखे।श्री गणेश पर आपको निरंतर ध्यान करना है। पृथ्वी पर बैठकर ध्यान करे सहजयोग में श्री गणेश और उनके गुणों की पूजा अपने अन्तस में करना बहुत महत्वपूर्ण है। आपका गणेश तत्व यदि ठीक है तो कोई भी आपको छू नही सकता, कोई भी आपको अशांत नही कर सकता क्योंकि श्री गणेश ही शांति के दाता है lयदि हम श्री गणेश और ईसा मसीह के अनुयायी है, तो हमारा व्यक्तित्व भी उन्ही की तरह से आध्यात्मिकत है। आध्यात्मिकता के अतिरिक्त आनन्द कहीं अन्यंत्र नहीं प्राप्त किया जा सकता। श्री गणेश की अभिव्यक्त सभी चक्रों पर होने से ही आंतरिक शांति और आनंद प्राप्त हो सकता है। वे सभी चक्रों पर प्रकट होते है। शीतल चैतन्य लहरियाँ -श्री गणेश की दी कृपा से प्राप्त होती है । निःसन्देह ये ब्रह्म चैतन्य है परन्तु श्री गणेश ही इनको प्रसारित करते हैं और अत्यन्त सन्तुष्ट एवं शांतिमय बनाते है । उस शान्ति में आप सब एक हो जाते है। आप में परस्पर एकाकारिता स्थापित हो जाती है।
उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।