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आत्मसाक्षात्कार द्वारा ब्रह्म तत्व की प्राप्ति ही सहजयोग है। : श्री माताजी

हजारों वर्षों पूर्व से मनीषियों द्वारा आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए कुंडलिनी शक्ति के जागरण के महत्व का वर्णन किया गया है।

आत्मसाक्षात्कार द्वारा ब्रह्म तत्व की प्राप्ति ही सहजयोग है। : श्री माताजी

मालवा हेराल्ड |भारतीय अध्यात्म आत्मा व परमात्मा के योग पर आधारित है। हजारों वर्षों पूर्व से मनीषियों द्वारा आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए कुंडलिनी शक्ति के जागरण के महत्व का वर्णन किया गया है।
हमारे भारतीय शास्त्रों में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि आत्मसाक्षात्कार की प्राप्ति के बिना, ब्रह्म की प्राप्ति असंभव है। लेकिन आत्मसाक्षात्कार क्या है ? यह वह ज्ञान है जो आपको आत्मदर्शन प्रदान करता है। सहजयोग संस्थापिका परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी ने कुंडलिनी जागरण व आत्मसाक्षात्कार का अत्यंत ही सहज माध्यम सहजयोग के रूप में हमें प्रदान किया है।

परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने अपने प्रवचन में कहा है कि, हमारे शरीर के रीढ़ की हड्डी के आधार पर, कुंडलिनी शक्ति स्थित है, जो हमारे भीतर पवित्र आत्मा (होली घोस्ट) का प्रतिबिंब है। और आत्मा हृदय में निहित है जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रतिबिंब है। मानव जीवन का लक्ष्य ब्रह्म तत्व की प्राप्ति है जो सनातन है । ब्रह्म अनादि है व अनन्त है तथा यह कभी नष्ट नहीं हो सकता। इसी ब्रह्म तत्व से सारी सृष्टि की रचना हुई । इस ब्रह्म तत्व को पाना ही मनुष्य जीवन का लक्ष्य है । ....... इसी ब्रह्म तत्व को जानने के लिए वेद लिखे गये । ' वेद ' जो है विद् से होता है ' विद् ' शब्द का मतलब है जानना , और अगर सारे वेद पढ़कर भी आपने अपने को नहीं जाना तो वेद व्यर्थ हैं । वेद का अर्थ ही खत्म हो गया , यदि आपने अपने को नहीं जाना । जब आप अपने को जान लेते हैं तो आपके अन्दर से ही ब्रह्म बहना शुरू हो जाता है मैं यहाँ ( पृथ्वी पर ) आपको वही चीज़ देने आयी हूँ , जिसे आप हज़ारों वर्षों से खोज रहे थे । यह आपकी अपनी ही है । आपकी अपनी ही है , सिर्फ मुझे उसकी कुंजी मालूम है । मैं कुछ अपना नहीं दे रही हूँ , आपका जो है उसे ही आपको सौंपने आयी हूँ । आप अपने को जान लीजिए और इस ब्रह्म तत्व को पा लीजिए । यही आत्मसाक्षात्कार है , क्योंकि आत्मा का प्रकाश ही ब्रह्म तत्व है , यही परमात्मा का साक्षात्कार है ...... जब तक आपने आत्मा को जाना नहीं आप परमात्मा को नहीं जान सकते । सबसे बड़ी सनातन बात यह है कि हम ब्रह्म - शक्ति से बने हैं और हमें उसको पाना है। अगर आपने उसे जाना नहीं तो आपने शक्ति को पाया नहीं । ब्रह्म को पाना है और उसके बाद इस सारी ब्रह्म विद्या को आपको पूरी तरह से जान लेना है । सारी ब्रह्म - विद्या आप जान जाएंगे - यही सहजयोग है । (प.पू. श्री माताजी , दिल्ली, 17/2/1981)
सहजयोग से निःशुल्क आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है। अधिक जानकारी हेतु आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख अधिक जानकारी देख सकते हैं।

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