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मानवता के अस्तित्व को संरक्षित करने का माध्यम है : सहज योग

परमात्मा ने सारी सृष्टि प्रेम से बनाई है और उसे पवित्रता से भरा है l

मानवता के अस्तित्व को संरक्षित करने का माध्यम है : सहज योग

मालवा हेराल्ड | यह सारी सृष्टि अत्यंत पवित्र है l उसमें जो कुछ भी अधम है, बुरा है वह मनुष्य द्वारा संचित किया हुआ है l क्योंकि, मनुष्य ही एक ऐसा जीव संसार में बनाया गया है, जो स्वतंत्र है, बाकी सारी सृष्टि परमात्मा के इशारे पर संचालित होती है, एक पत्ता भी उनके इशारे के बगैर नहीं हिलता, सारी सृष्टि में जो अधम से अधम है, जो नर्क से नर्क है, जो पाप से बढकर पाप है, वह सब मनुष्य का ही बनाया हुआ है l ऐसे ही लोग शैतान के रुप में विचरण करते हैं l
जब, तक हम शैतान को शैतान नहीं कहेंगे, अधम को अधम नहीं कहेंगे, बुरा को बुरा नहीं कहेंगे तब तक हमारे अंदर अच्छाई जागृत नहीं होगी l जब तक आपके अंदर का सत्य प्रकट नहीं होगा, तब तक संसार में सत्य कैसे फैल सकता है l सहज योग रूपी दीपक बुराई के इस अंधकार में आशा का प्रकाश है। इस अंधकार में भी जिन जिन्होंने परम कार्य किये हैं वे सितारों जैसे चमकेंगे, तारों जैसी उनकी महिमा होगी l
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी मानव रुप में अवतरित हुईं ताकि वो मनुष्य को पुनर्जन्म दे सके, और हमें हमारे ही अस्तित्व से जोड़ सकें ताकि हम भी संसार को सत्य का सूरज दिखा सकें, सहज योग के साधकों ने ध्यान के दौरान अपने दिव्य शरीर को या यूं कह सकते हैं कि आत्म स्वरूप को अनुभव किया है l इतिहास साक्षी है कि किस तरह लाखों लोगों की कुंडलिनी शक्ति श्री माताजी के समक्ष जागृत होती थी, और आज जब श्री माताजी निराकार स्वरुप में हैं तब भी सहज योग में साधक श्री माताजी को साक्षी रख, उनके ही आशिर्वाद से हजारों लोगों की कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने का कार्य कर रहे हैं l
आप भी स्नेह पूर्वक आमंत्रित है सहज योग ध्यान केन्द्रों में कुंडलिनी जागरण और आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने हेतु इसके लिए आप अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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