सनातन संस्कृति द्वारा संस्थापित वैज्ञानिक जीवनशैली की पुनर्स्थापना ही सहजयोग है
सहजयोग हमें आत्मपरीक्षण द्वारा संतुलन में स्थापित होना सिखाता है

मालवा हेराल्ड |सहजयोग प.पू श्रीमाताजी निर्मला देवी द्वारा मानवता को दिया हुआ एक अमूल्य उपहार है । ध्यान संपूर्ण निर्विचारिता प्राप्त कर सभी नकारात्मक विचारों से, तनाव से छूटने की एक अद्भुत पद्धति है। सहजयोग ध्यान से हम आत्म परीक्षण कर सकते हैं, कैसे ? हमारे शरीर में सात चक्र व तीन मुख्य नाड़ियां होती हैं तथा मूलाधार में कुंडलिनी शक्ति सुषुप्तावस्था में स्थित होती है। सहजयोग में श्री माताजी की कृपा में जब कुंडलिनी जागरण का योग घटित होता है तो आत्मसाक्षात्कार के पश्चात् हम अपने चक्रों व नाड़ियों में होने वाले असंतुलन को स्वयं अपनी उंगलियों के छोरो पर वाइब्रेशंस के रूप में अनुभव करने लगते हैं । इसलिए मोहम्मद साहब ने कहा था की जब कियामा आयेगा तब आपके हाथ बोलने लगेंगे । अगर आपके दाहिने विशुद्धि में कुछ खराबी हो तो आपके दाहिने हाथ के अंगूठे की बाजूवाली उँगली में आपको जलन या गर्मी महसूस होगी | इसका अर्थ है कि अब आपमें थोड़ा अहम आ गया। अब क्या करें? विनम्रता विशुद्धि के अहम पर विजय पाने का सर्वोत्तम मार्ग है। दूसरों से बात करते समय ऐसे तौर तरीके विकसित करें कि किसी का दिल न दुखे। अब आप हैरान होंगे कि बिना किसी देरी के विशुद्धी अविश्वसनीय रूप से मधुरता पूर्वक बर्ताव करने लगेगी ।
यह संपूर्ण प्रक्रिया भारतीय अध्यात्म द्वारा प्रदत्त एक वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है। जिसकी जटिलताओं को सहजयोग में श्री माताजी ने अत्यंत सुगम बना दिया है।
भारतीय सनातन संस्कृति प्रकृति, परमात्मा, आत्मा, सूक्ष्म शरीर व स्थूल शरीर के मध्य तारतम्य बिठा कर संतुलित जीवन का संदेश देती है। जिसमें सांसारिकता को जीते हुए भी आप इसमें लिप्त नहीं होते।
संसार में लिप्तता मात्र मानव का अभिमान होता है।
...तो आपको अपना मिथ्याभिमान समर्पित करना है । यह मिथ्याभिमान बहुत प्रकार का हो सकता है, उन चीजों का जो पूर्ण तथा बनावटी होती है। परमात्मा के सम्मुख आपकी संपत्ती कौन सी है? आपका पैसा क्या है? आपका पद क्या है? आपका परिवार, शिक्षा क्या है? परमात्मा के सम्मुख ये सभी चीजे मूल्यहीन हैं, अतः व्यक्ति को महसूस करना है कि यदि हम परमात्मा की सम्पत्ति हैं तो हमे केवल एक ही चीज पर गर्व होना चाहिए कि उनका चैतन्य हमारे माध्यम से प्रवाहित होता है अर्थात उन्हें हम पर गर्व है l
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