सहजयोग ध्यान वह पतवार है जो जीवन रूपी नौका को सहजता से भवसागर पार कराती है
कबीर कहते है
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय
दो पाटों के बीच में, साबत बचा न कोय ॥

मालवा हेराल्ड |अर्थात जिस प्रकार अनाज चक्की में पीसा जाता है, उसी प्रकार हम भी भवसागर रूपी चक्की में पीसे जाने की यातना को अनुभव करते हैं। यह प्रक्रिया अनायास हमारे जीवन की चक्की को रात-दिन घुमा रही है और हम जाने-अनजाने बौद्धिक व भौतिक उपलब्धियों के पाटों के बीच भावनात्मक रूप से पिसते चले जा रहें हैं। इस दुविधा से बाहर आने की चेष्टा करने वालों के लिए ध्यान-धारणा का मार्ग निःसंदेह उत्तम व सुगम है।
जैसा कि सर्व विदित है,
जब भी हम भिन्न-भिन्न मानसिक व शारीरिक बिमारियों के रूप में खुद पर हो रहे नकारात्मक प्रभावों से अवगत होते हैं, सभी उपचार विधाओं को पूरा करने के बाद हमें अंत में स्थिरता लाने के लिए चिकित्सक ध्यान-धारणा के लिए प्रेरित करते हैं। अच्छे उच्च कोटि के अनुसंधान व चिकित्सक केन्द्रों ने ध्यान को प्रतिदिन अपनी चिकित्सा प्रणाली का अभिन्न अंग बना लिया है। अब प्रश्न यह उठता है कि हम क्यों किसी बड़ी बीमारी या समस्या का इंतजार करें और उसके बाद ध्यान पद्धति को सीखें ? स्वस्थ रहने के लिए बीमारी यह इंतजार क्यों जबकि खुशहाल जीवन सहजता से प्राप्त किया जा सकता है।
पं. पू. श्री माताजी निर्मला देवी कहती हैं, ध्यान में जमने के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे चारों ओर आसपास का जो वातावरण है उस से जूझने की कोई जरूरत नहीं है। आप अपने से ही अगर ठीक हो जाए अर्थात अंदर से ही आप स्थिर हो जाए तो बाहर जितनी भी चीजें हैं धीरे-धीरे अपने आप स्थिर हो जाएगी। जो कुछ अंदर है वही बाहर है अगर अंदर से अव्यवस्थित है तो बाहर जितना भी झंझावात हो तो उसका जबरदस्त असर होगा, पर आप अंदर से अगर बिलकुल शांत है तो बाहर जो भी हो रहा है उसका असर नहीं होगा, उल्टा जो बाहर है वह भी शांत हो जाएगा। सबसे बड़ी चीज़ है अपने को जमा लेना।
जी हाँ, स्वयं को जमा लेना स्वयं के अंदर, मध्य में, पूर्ण तरह संतुलन में l जैसा कि चक्की के बीच में जो ज्ञान की दंड है उससे निकट जो जौ या गेंहूँ बिना पिसे चक्की से बाहर आ जाता है। उसी तरह सहजयोग ध्यान के माध्यम से ध्यान रूपी दंड को पकड़ कर हम भी दोनो पाटों के बीच में पिसने से स्वयं को बचा सकते हैं। सहजयोग ध्यान करे बारे में अधिक जानकारी हेतु टोल फ्री नंबर 18002700800 या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर संपर्क करें।