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चित्त-शक्ति से आत्मा का उत्थान होता है - सहजयोग

सहजयोग

चित्त-शक्ति से आत्मा का उत्थान होता है - सहजयोग

मालवा हेराल्ड | प्रत्येक व्यक्ति अपनी आत्मा से परिचित होना चाहता है। आत्मा से तदाकार होना यानि स्व को जानना | आत्मा और चित्त वस्तुतः उत्थान की कड़ी है |
सहजयोग की संस्थापक आदिशक्ति श्री माता जी निर्मला देवी जी द्वारा जन-जन के कल्याण के लिए की गई है। पूर्ण समर्पण और शुद्ध चित्त शक्ति से आत्म उत्थान पाया जा सकता है। श्री माता जी ने अपने प्रवचन में आध्यात्मिक उत्थान के लिए चित्त की शक्ति को महत्वपूर्ण बताया है और उन्होंने कहा है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपका चित्त परमात्मा पर होना चाहिए। परमात्मा में विश्वास का अर्थ है कि हम विश्वास के नाम पर हर तरह की मूर्खतापूर्ण चीजें करते हैं। लेकिन परमात्मा पर चित्त रखने का तात्पर्य परमात्मा से मांगने से है, है परमात्मा मैं कब अपनी आत्मा को प्राप्त करूंगा, आप मुझे कब अपने साम्राज्य का भक्त स्वीकार करेंगे, आप मुझे कब अपना यंत्र या माध्यम बनाएंगे, आपका चित्त ऐसा होना चाहिए, अगर आपका चित्त ऐसा है और आप वास्तव में इसके बारे में शुद्ध स्वभाव के हैं, तो यह कार्य करेगा। यह कार्य करता है। आत्मा से तादात्म्य प्राप्त करके जीवन में प्रसन्नता, शांति, सुख और संतोष पा सकते है इस हेतु आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करें इसमें ध्यान की प्रक्रिया अत्यंत ही सरल रूप से बतलायी गई है।
इसके लिए के लिए आप हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर जानकारी प्राप्त लेकर आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर सकते हैं। यह पूर्णतः नि: शुल्क है।

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