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सहजयोग साधक को प्रेम सिखाता है

सहजयोग ध्यान करने की सरल, नैसर्गिक और सहज पद्धति है l सहजयोग का ये ज्ञान हमारे सभी प्राचिन ग्रंथों में वर्णित है l

सहजयोग साधक को प्रेम सिखाता है

मालवा हेराल्ड |आठवीं सदी में आदिशंकराचार्य जी ने "सौंदर्यलहरी" ग्रंथ लिखा और इस ग्रंथ में कुण्डलिनी जागरण के इस रहस्य को उदघाटित किया l
वो अपने ग्रंथ में लिखते हैं
"समुन्मील त्संवितकमल मकरंद्रेकरसिकं
भजे हंसद्वंदम महताम मानसचरम्
यदालापदष्टाढश गुणित विद्या परिणतीः
यदादले दोषाद गुणमखिल मदभ्यः पयहुव"

आदिशंकराचार्य जी कहते हैं "संवितकमल" नाम का यह जो अनहद चक्र है, इसमे शिव और शक्ति हंसेश्वर और हंसेश्वरी रूप में विराजमान है l आदिशक्ति, कुण्डलिनी माता की पूजा करने वाला सच्चा साधक अपने चित्त को बाहव्य भौतिक चीजों से हटाकर, उस चित्त को अपने ह्रदय में भगवती के चरणकमलों पर स्थिर करता है, चरणकमलों का ध्यान करता है l भ्रमर जिस प्रकार पूर्णतया तल्लीन होकर मकरंदरस का प्राशन करता है, ठीक वैसे ही सच्चा साधक भगवती, आदिशक्ति से पूर्ण तादात्म्य का अनुभव करता है, तब उसका अनहद चक्र खुलता है और मकरंद रस का अनुभव कराने वाला परमानंदमयी झरना उसके ह्रदय देश से निकलकर, उसके मानस सरोवर मे छा जाता है l भगवती का ये साधक अपने आप अठारह प्रकार की विद्याओं में पारंगत होता है और वह "हंसेश्वर और हंसेश्वरी साधक को नीरक्षीरविवेक, सद्सद्
विवेक से अलंकृत करते हैं l आदिशंकराचार्य जी के इस श्लोक मे वर्णित ध्यान का आनंद सभी सहजयोगियो ने लिया है l

प. पू. माताजी श्री निर्मला देवी ने कुण्डलिनी जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार देने की यह अदभुत विधि खोज निकाली और हम और आप जैसे सभी गृहस्थ साधकों के लिए "आत्मज्ञान" का ये कुंभ खोल दिया! श्री माताजी कहते है, जब आपका अनहद चक्र जाग्रत होता है तो आपको आत्मविश्वास और निडरता प्राप्त होती है! क्योंकि ये चक्र जगत जननी माँ 'जगदम्बा' का स्थान है l ये देवी जगदम्बा जो हैं ये भक्तों की रक्षा करती है, उसके लिए उन्होंने राक्षसों का वध की, उनका रक्त पिया उन्होंने राक्षसों का वध करके सभी भक्तों की रक्षा की है l

श्री माताजी कहते है, ह्रदय चक्र जागृत होते ही प्रेम रूपी मकरंद रस आपके ह्रदय से उमड़ने लगता है l मानव को परमात्मा के दिए उपहारों में से प्रेम सबसे बड़ा उपहार है और व्यक्ति को चाहिए कि प्रयत्न करके इसे विकसित करे l प्रेम मे स्वार्थ नहीं होता, आनंद होता है और इसी आनंद की अनुभूति आपने करनी है और अन्य लोगों को भी देनी है l प्रेम आदिशक्ति का संदेश है।

प.पू. माताजी निर्मला देवी, कबेला, (24/6/2007)

कुण्डलिनी जाग्रति और सहजयोग ध्यान का आनंद और अनगिनत लाभ लेने हेतु आप जानकारी निम्न साधनों से पा सकते हैं!
वेबसाइट – www.sahajyoga.org.in
टोल फ्री नं – 1800 2700 800
यूट्यूब चैनल – लर्निंग सहजयोगा प्रति शनिवार शाम 06:30 बजे.

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