ध्यान के माध्यम से आध्यात्म का बोध ही सहजयोग है
सहजयोग

मालवा हेराल्ड | सामान्यतः ध्यान को तात्कालिक लाभ या तनाव दूर करने के लिए किया जाता है परंतु नियमित ध्यान का उपयोग दीर्घकालीन स्वास्थ्य लाभ के लिए सहायक होता है। सहजयोग में कुंडलिनी जागरण एवं आत्मसाक्षात्कार द्वारा यह सब कुछ, स्वत: ही घटित होने लगता है और आप पाते है कि दीर्घकालिक लाभ जैसे अपने जीवन में अधिक स्थायित्व, सकारात्मक लक्षण, परिवर्तन, संतुलित और शांतिपूर्ण व्यक्तित्व। यह सब कुंडलिनी जागरण द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। यह न केवल आपको निर्विचार करता है, बल्कि आपके आध्यात्मिक विकास में भी सहायक होता है ।
श्री माता जी निर्मला देवी की कृपा से हर साधक,भक्त को उनके आशीर्वाद स्वरुप दैवीय शक्ति प्राप्त होती है जिससे कि कुंडलिनी शक्ति का जागरण संभव हो पाता है, कुंडलिनी के जागरण से मनुष्य में सभी तरह की नकारात्मकता खत्म हो जाती है और वह ईश्वरीय शक्ति से हमेशा के लिए जुड़ जाता है उस शक्ति से जुड़ने पर साधक को तालु भाग पर व अपनी अंगुलियों के ऊपर पोरो पर शीतलता महसूस होती है। तदुपरांत साधक शांति व समाधान को प्राप्त कर पाता है। यही सहजयोग की पहली व अंतिम क्रिया होती है जिससे हर मनुष्य अपने आप में अनुभूति प्राप्त करता है।
उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।