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सहजयोग द्वारा जाने देवनागरी वर्णमाला के अक्षरों का दैवीय सौंदर्य

सहजयोग

सहजयोग द्वारा जाने देवनागरी वर्णमाला के अक्षरों का दैवीय सौंदर्य

मालवा हेराल्ड |ज्ञातव्य है कि हमारे शरीर का भौतिक, मानसिक व आध्यात्मिक पोषण, संचालन व नियंत्रण हमारे भीतर स्थित 7 ऊर्जा केंद्रों व मष्तिष्क के द्वारा होता है। नाड़ी तंत्र द्वारा इन ऊर्जा केंद्रों का विस्तार पूरे शरीर में होकर हमारे हाथ की अंगुलियों के सिरों तक फैला हुआ है।

चक्र व नाड़ियों का यह तंत्र एक उल्टे पेड़ की तरह है, जिसकी जड़े (ऊर्जा केन्द्रों की पीठे) मष्तिष्क में हैं, और असंख्य शाखाएं पूरे शरीर में फैली हुई हैं। रीढ़ की हड्डी के नीचे स्थित मूलाधार चक्र से लेकर मष्तिष्क के तालू भाग में स्थित सहस्त्रार चक्र सभी चक्र फूलों की भांति हैं, जिनके रंग व पंखुड़ियों की संख्या निश्चित है।

सभी शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक, सामाजिक आदि समस्याएं इन्हीं ऊर्जा केंद्रों के असंतुलन से पैदा होती हैं। इन्हीं चक्रों के संतुलन में मानव व विश्व का कल्याण निहित है।

देव नागरी वर्णमाला के अक्षर दैवीय शक्तियों के साथ इन्हीं पंखुड़ियों पर आसीन हैं।
उदाहरणार्थ- हमारे विशुद्धि चक्र पर अ से अ: तक के 16 स्वर, चित्र में दर्शाए अनुसार, पंखुड़ियों पर विराजमान हैं।
इसी प्रकार व्यंजन क,ख,ग, आदि अन्य चक्रों पर।

विशुद्धि चक्र -हमारी गर्दन में पीछे की ओर स्थित है। इस चक्र का तत्व आकाश व देवता श्रीराधा-कृष्ण हैं। इसका रंग नीला और 16 पंखुड़ियां हैं।

विशुद्धि चक्र मुख्यतः हमारे ENT (कान, नाक, गला) को नियंत्रित करता है। इसका विस्तार हमारे हाथों की तर्जनी (अंगूठे के पास वाली उंगलियां) तक है।

कानों में तर्जनी डालकर आकाश को देखते हुए परमात्मा की महिमा का बखान करने पर, वह प्रार्थना श्रीकृष्ण के विराट रूप को समर्पित हो जाती है।
मस्तक पर स्थित आज्ञा चक्र पर की गई प्रार्थना श्रीकृष्ण के पुत्र महाविष्णु को समर्पित होती है।

उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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