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आत्म चेतना का ध्यान द्वारा विकास व तरंगों के रूप में विस्तार ही है सहजयोग

सहजयोग, ध्यान की एक सरल व शास्त्रीय पद्धति है।

आत्म चेतना का  ध्यान द्वारा विकास व तरंगों के रूप में विस्तार ही है सहजयोग

मालवा हेराल्ड | सामान्यतः ध्यान को तात्कालिक लाभ या तनाव दूर करने के लिए किया जाता है। परंतु इसका उपयोग दीर्घकालीन स्वास्थ्य लाभ के लिए भी किया जा सकता है। सहजयोग ध्यान करने की एक सहज , सरल और शास्त्रीय पद्धति है । प.पू. माताजी श्री निर्मला देवी जी ने 5 मई 1970 को कुंडलिनी जागरण द्वारा सामूहिक आत्मसाक्षात्कार देने की एक अभिनव पद्धति विकसित की और आज संपूर्ण विश्व के लोग इस पद्धति का लाभ उठा रहे हैं । शारीरिक , मानासिक , भावनात्मक और आध्यात्मिक समस्याओं से निज़ात पा रहे हैं ।
सहजयोग ध्यान पद्धति शास्त्रीय इसलिए है क्योंकि यह अपनी शरीर रचना शास्त्र पर आधारित है । माँ की कृपा से जब साधक को आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है , तब सर्वप्रथम उसके अंतर्स्थित संपूर्ण नस - नाड़ियों का शुद्धिकरण होता है। सहजयोग में कुंडलिनी जागरण एवं आत्मसाक्षात्कार द्वारा यह सब कुछ, स्वत: ही घटित होने लगता है और आप पाते है कि दीर्घकालिक लाभ जैसे- अपने जीवन में अधिक स्थायित्व, सकारात्मक लक्षण, परिवर्तन, संतुलित और शांतिपूर्ण व्यक्तित्व। यह सब कुंडलिनी जागरण द्वारा प्राप्त किया जा सकता है यह न केवल आपको निर्विचार करता है, बल्कि आपके आध्यात्मिक विकास में भी सहायक होता है ।
श्री माता जी निर्मला देवी की कृपा से हर साधक,भक्त को उनके आशीर्वाद स्वरुप दैवीय शक्ति प्राप्त होती है जिसे कि कुंडलिनी शक्ति कहा जाता है, कुंडलिनी के जागरण से मनुष्य में सभी तरह की नकारात्मकता खत्म हो जाती है और वह ईश्वरी शक्ति से हमेशा के लिए जुड़ जाता है उस शक्ति से जुड़ने पर साधक को तालु भाग पर व अपनी अंगुलियों के ऊपर पोरों पर शीतलता महसूस होती है इसी से उसके परिवार में शांति व समाधान प्राप्त हो जाता है ।
उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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