आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के बाद ही अवतरणों की शक्ति को समझा जा सकता है - सहजयोग
सच पुराणा होवे नाही ll
सचु ता परु जाणीओ जा रिहै सच होई॥
कूढ़ की मलु उतरे ,तनु करे हछा धोइ ॥

मालवा हेराल्ड |गुरु नानक जी कहते है, सच कभी भी पुराना नहीं होता। जगत के सच को तभी जाना जा सकता है जब हृदय में प्रभु का वास हो जाए। ऐसा होने पर मन से झूठ की मेल उतर जाती है l और मन के साथ ही तन भी सुन्दर हो जाता है। गुरुनानक देवजी के इस वचन को सहजयोग में अनुभूत किया जा सकता है। सहजयोग एक अभिनव ध्यानाविष्कार है l
जो आज के कलियुग में मानव को मानसिक शांति शारीरिक सुदृढता और अध्यात्म की ओर ले जाने मे कारागर साबित हो रहा है l
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी कहते हैं कि आज तक जितने भी अवतार आये, उन्होंने सत्य को स्थापित करने का पूर्ण प्रयास किया। परंतु इन सभी अवतारों को सामान्य मानव नहीं समझ सकता। क्योंकि मानव अपनी बुद्धि से इस सत्य को नही समझ सकता।
आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है तब हमारे ह्रदय मे स्थित आत्मा प्रकाशित होती है l और हमारे मूलाधार स्थित कुंडलिनी माता उर्ध्वगामी होकर, हमारे सातों चक्रों को पार कर सहस्त्रार तक पहुँच जाती है। ये आंतरिक घटना जब साधक के अंतः मन में घटित होती है, तब उसे अनिर्वचनीय आनंद की प्राप्ति होती है। इस आनंद को पुनः प्राप्त करने के लिये वह साधक हर दिन ध्यान करता है। नियमित ध्यान करने से साधक का मस्तिष्क कारण और परिणाम से परे जाता है l और ब्रम्हांड मे फैले इस चैतन्य से एकाकार हो जाता है। कोई भी सामान्य व्यक्ति केवल आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के बाद ही संतो की वाणी को समझ उसमें अवतरणों की शक्ति को समझ सकता है l क्योंकि तभी उसका सहस्त्रार चक्र धीरे-धीरे समृद्ध होता है l जिसे नानकदेवजी ने 'सचखंडे' बैकुंठ सचखंड कहा है।
आपको भी अगर इस सचखंड को जानना है तो आज ही सीखें सहजयोग ध्यान ,सहजयोग से निःशुल्क आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है। अधिक जानकारी हेतु आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख अधिक जानकारी देख सकते हैं।