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संपूर्ण ज्ञान व विज्ञान का स्रोत परमशक्ति है मानव मात्र उसके प्राकट्य का माध्यम है

सहजयोग

संपूर्ण ज्ञान व विज्ञान का स्रोत  परमशक्ति है मानव मात्र उसके प्राकट्य का माध्यम है

मालवा हेराल्ड |सहजयोग संस्थापिका श्री माताजी निर्मला देवी जी परमपिता की दिव्य सत्ता के बारे में जानकारी देती हैं कि चाहे ज्ञान हो या विज्ञान परमात्मा की शक्तियों को चुनौती नहीं दी जा सकती। परंतु हम इसका हिस्सा बन इसके
आनंद के अधिकारी अवश्य हो सकते हैं। श्री माताजी ने इस यात्रा का सहज मार्ग सहजयोग के रूप में हमें प्रदान किया है।
"जैसे कि केमिस्ट्री के बड़े बड़े वैज्ञानिक हैं वो कहते हैं कि ये जो Periodic Laws जो बनाये गये हैं ये समझ में नहीं आते कि किस तरह से बनाये गये हैं, एक विचित्र तरह की रचना करके इतनी सुन्दरता से एक एक अणु रेणु को किस तरह से रचा गया है, एक एक अणु में एक ब्रह्माण्ड किस तरह से समाया गया है, ये कुछ समझ में नहीं आता है, वे कहते हैं कि इनकी रचना का कार्य तो हम कर ही नहीं सकते हैं, रही बात ये कि ये रचना कैसे हुई ये भी हम नहीं बता सकते, ये पृथ्वी इतने गति से घूम रही है, ये किस तरह से घूम रही है और उस पर ये Gravity किस तरह से काम कर रही है, ये हम बता सकते हैं कि ये काम कर रही है लेकिन वो किस तरह से कर रही है, इस मामले में साइंस कुछ भी नहीं कहता है, आइंस्टीन जैसे बड़े बड़े वैज्ञानिक ने बार-बार दोहरा कर कहा कि कोई तो ऐसा अज्ञात जगह है जहाँ से सारा ज्ञान हमारे पास आता है | भगवान से बढकर कोई अधिक प्रेक्टीकल है ही नहीं, आप में जितनी भी अक्ल आयी है उसका स्त्रोत वही है, अंतर इतना ही है कि वो सुबुद्धि का Wisdom का स्त्रोत है, मूर्खता का नहीं, जिसको आप बहुत प्रेक्टीकल बात कहते हैं वो महा मूर्खता की बात है, आप अपने को बहुत अक्लमंद समझ कर इस संसार में चलते हैं, भगवान से चालाकी नहीं चलती है।" (26 दिसम्बर 1975 मुम्बई में दिए प्रवचन से साभार । )'

सहजयोग अत्यंत सहज व पूर्णतया नि:शुल्क ध्यान पद्धति है। उपरोक्त बताई गई संक्षिप्त जानकारी का विस्तृत अध्ययन करने के लिए यदि साधक कोई भी प्रश्न अपने मन में रखता है तो वह हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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