सहजयोग के माध्यम से अलख पुरुष(आत्मा) का साक्षात् प्राप्त कर
परमेश्वरी शक्ति का अनुभव प्राप्त करें

मालवा हेराल्ड |तुरुक मसीहत देहर हिन्दू । आप आप को धाय ll
अलख पुरुष घट भीतरे। ताका पार न पाय ll
उपरोक्त दोहे मे संत कबीर कहते हैं हम सभी लोग अपने-अपने धर्म का अनुसरण करने के लिये मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च में जाते हैं। हम सभी की ऐसी धारणा है कि जब हम देवालय मे जाकर पुष्प, प्रसाद, दक्षिणा प्रदान करने के बाद ही भगवान की प्राप्ति हो जायेगी परंतु संत कबीर कहते हैं कि निर्गुण, निराकार, चैतन्यमयी अलख पुरुष याने की 'आत्मा' हमारे ह्रदय में स्थित है, इस रहस्य को तो कोई नहीं जानता । उपनिषद् कहते हैं, आत्मा रसो से व:" अर्थात केवल आत्मा ही रस पूर्ण और निरानंद प्रदान करने वाला स्रोत है l
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी कहती हैं कि हम उस निरानंद प्रदान करने वाली आत्मा को जब तक जानते नहीं, तब तक जीवन मे तथाकथित सुख-दुःख का सामना नहीं कर सकते l
इसका आनंद हम नहीं उठा सकते हैं l वह कहती हैं कि सहजयोग में जब आपको आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है तो, आप धीरे-धीरे'निर्विचारिता 'यानि कि 'शून्यस्थिती जिसके बारे में संत कबीर ने कहा है, "शून्य शिखर पर अनहद वाजे' प्राप्त करते हैं । उस स्थिती का आप आनंद लेने लगते हैं। दैनिक गृहस्थ जीवनयापन करते हुए भी आप परमेश्वरी कृपा की अनुभूति कर सकते हैं।
आपका जीवन आनंदमय, उल्लासित और चैतन्यमयी बनता है। आप आपके ह्रदय में सभी के प्रति प्रेम अनुभव करते हैं और आपको लगता है कि हमने जो अमृतमयी आनंद पाया है, वो सभी को मिले। आपको लगता है कि अपने हृदय में स्थित इस अलख पुरुष को सभी लोग जानें । क्योंकि ये अलख पुरुष तो सभी के घट भीतर है और सहजयोग मे इसकी सहज ही प्राप्ति हो जाती है।
आपको भी अगर उस अलख पुरुष को पाना है तो आज ही सहजयोग ध्यान का अनुभव प्राप्त करें l सहजयोग द्वारा निःशुल्क आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है। अधिक जानकारी हेतु हमारे हेल्पलाइन नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।