विजयादशमी पर्व -रावण रूपी मायावी देह को जलाकर राम रूपी आत्मा का अमर होना ही है इस पर्व का संदेश
राम राम सर्वही म्हणती ll
कोडणी न जाणती आत्माराम ||

महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत समर्थ रामदास स्वामी भी कहते हैं राम-राम सब कहते हैं, परंतु आत्मा के राम ही भगवान राम है | जिस राम की उपासना करते हैं उसका मूल अंतरात्मा की उपासना में है और जिस रावण को आत्मा रूपी राम भक्ति रूपी बाण से मारते हैं वह मोह, माया, दुष्ट प्रवृत्ति और अहंकार रूपी देह है , इसीलिए जलाया जाता है |
जनमानस में राम ईश्वर होने के साथ साथ नायक के रूप में भी पूजे जाते हैं | धर्म ग्रंथों में भी राम के रामत्व की स्थापना एक विशेष सामाजिक योजना की और संकेत करती है | एक और है रामत्व और दूसरी और रावणत्व रावण हिंसा, अधर्म और भौतिक संस्कृति का प्रतीक है, तो राम प्रेम, धर्म ,करुणा ,दया मानवता के प्रतीक है | समाज में राम और रावण के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि संपूर्ण समाज में सुख शांति और आनंद और चेतनता स्थायित्व रखना है तो राम जैसे नायक बनना होगा | धर्म ,न्याय, नीति से चलने वाला मर्यादा पुरुषोत्तम, लोक कल्याणकारी, कर्तव्य दक्ष राजा, एक वाणी, एक पत्नी व्रत धारी, परमार्थी, ज्ञानी आदि गुणों वाले रामस्वरूप ही संपूर्ण समाज का उत्थान कर सकते हैं | रावण असल में दुर्बुद्धि प्रधान भौतिक जीवन की, अपार समृद्धि की राक्षसी माया है जो जड़ को तो देखता है चेतनता को नहीं दैहिक दुर्बुद्धि और संपन्नता रूपी राक्षसी प्रवृत्तियाँ आत्मिक नैतिक मूल्यों का ह्रास कर देती है |
सहजयोग की ध्यान द्वारा आत्म जागृति ही वास्तव में आत्मा में बसे राम का जागरण कराकर मानव बुद्धि की बोध से पहचान करता है।
असल में राम रावण युद्ध ही देह पर आत्मा की विजय का रूपक है | रावण रूपी मायावी देह को जलाकर राम रूपी आत्मा का अमर होना ही दशहरा त्योहार का महत्व दर्शाता है |
राम की भक्ति को पूर्ण संस्कृति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और रावण को नकारात्मक , तामसी, अवगुणी, मोह माया के बंधनों में जकड़ा समाज और संस्कृति के शत्रु के रूप में दर्शाया जाता है| इस शत्रु का नाश कैसे हो,आत्मा में श्रीराम का शौर्य कैसे जागे,और इन सब से ऊपर उठ कर आध्यात्मिक विजय का शंखनाद कैसे हो, इन सारे प्रश्नों के समाधानों की एक ही राह है सहजयोग ध्यान। जो आत्मा को अनुभूत कराता है।मानव के भीतर सोए आध्यात्म को सही अर्थों में जगाता है।यही तो है आत्माराम की जागृति का पुण्य काल। नि:शुल्क अनुभव हेतु विजिट करें www.sahajayoga.org.in पर, या आप हमारे टोल फ्री नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते है l