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सांसारिकता व आध्यात्मिकता एक दूसरे के पूरक हैं, दोनों में सामंजस्य ही मोक्ष का मार्ग है

मोक्ष का अर्थ है परमात्मा से एकाकारिता - सहजयोग

सांसारिकता व आध्यात्मिकता एक दूसरे के पूरक हैं, दोनों में सामंजस्य ही मोक्ष का मार्ग है

मालवा हेराल्ड |यदि कोई यह पूछे कि आध्यात्म का अंतिम चरण क्या है ? तो आध्यात्म से जुड़े हर साधक का जवाब होगा 'मोक्ष'| दरअसल आध्यात्मिक जीवन का लक्ष्य ही मोक्ष है|
सांसारिक जीवन को जीते हुए हम भले ही छोटी छोटी समस्याओं में उलझकर अंतिम लक्ष्य को भूल जाते हों, उन छोटी मोटी समस्याओं को ही अपना लक्ष्य मान लेते हो, और निवारण पा लेने पर पूर्णतया संतुष्ट हो जाते हों, पर यह संतुष्टि तात्कालिक ही होती है| ना तो समस्यायें समाप्त होती है, ना ही सांसारिक जीवन में हमारे प्रयास को विराम मिल पाता है|
सांसारिक जीवन में रहकर आध्यात्मिक उत्थान की ओर अग्रसर होने का सरल मार्ग है सहजयोग | सहजयोग में पुनर्जन्म व मोक्ष की प्राप्ति बेहद आसान तरीके से अपने पारिवारिक जीवन को जीते हुए सहज ध्यान व आत्मसाक्षात्कार से प्राप्त किया जा सकता है| यह एक आम धारणा है कि मृत्यु के उपरांत ही मोक्ष की प्राप्ति होती है| परंतु सहज योग प्रणेता परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने आत्मसाक्षात्कार को ही हमारा पुनर्जन्म बताया है और सहज ध्यान साधना को मोक्ष पाने का मार्ग|
हमारे अंदर स्थित कुंडलिनी शक्ति जब सहज योग माध्यम से जागृत होती है, तब कुंडलिनी शक्ति हमारे तालु भाग में स्थित सूक्ष्मतम ब्रह्मरंध्र को भेदकर विराट से हमारी एकाकारिता कराती है, तब वह स्थिति सहज योग में मोक्ष ही है क्योंकि मोक्ष का अर्थ ही परमात्मा से एकाकारिता ही है| आप सब इस अनुभूति को आत्मसात करें व सहज योग को पूर्ण निष्ठा से अपनायें|
अपने आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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