परमात्मा से योग व द्वैतवाद से मुक्ति ही मानव जीवन का ध्येय है
जीवन को प्रत्येक परिस्थिति में सहज संतुलन प्रदान करता है सहजयोग

मालवा हेराल्ड |योग को चाहने वाले साधकों को संबोधित करते हुए श्री माताजी निर्मला देवी कहती हैं कि लोग पूछेंगे, सत्य क्या है? लेकिन प्रकाश के बिना, हम इसकी व्याख्या कैसे कर सकते हैं ? मान लो कि आपको सड़क पर या अन्य किसी जगह पर एक रस्सी पड़ी हुई मिलती है, और आप डर जाते हैं। जब तक आप उस पर रोशनी डाल कर यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि यह तो केवल एक रस्सी है, और वह (साँप ) एक भ्रम था, तब तक आप अपने आप को कैसे समझाएंगे कि यह साँप नहीं है, बल्कि यह मात्र एक रस्सी पड़ी हुई है । अत: पहली चीज़ है कि आपका चित्त आलोकित होना चाहिए । और आपको अपनी अज्ञानता से छुटकारा पाने के लिए, सत्य को खोजना होगा और तब आप जान पाते हैं कि यह स्व, यह आत्मा ही आनंद बिखेरती है - ऐसा आनंद जो सुख और दुख के द्वैतवाद से परे है। वैसा बनने के लिए आपको उससे परे जाना होगा, द्वैतवाद से परे । वही आपकी मंजिल है। मंजिल पाने हेतु प्रथम कदम आत्मसाक्षात्कार, जो सहजयोग में पूर्णतः निःशुल्क है। परमात्मा को पाने के लिए हमारा शरीर एक माध्यम मात्र है l हमने शरीर को इसलिए धारण किया है कि हम परमात्मा को पाएं और मोक्ष प्राप्त करें । सहजयोग में दैवीय शक्ति के आशीर्वाद को कुंडलिनी जागरण के उपरांत अपने हाथों पर और तालु भाग पर शीतल चैतन्य लहरियों के प्रवाह से अनुभव किया जा सकता है।
परमात्मा तो अनंत है उनका कोई मोल नहीं है।उन तक पहुंचने के लिए रूपए पैसे की क्या जरूरत है ? उन तक पहुंचने के लिए आपको खुद को जानना होगा ।अपनी आत्मा को जानना होगा जिसके बारे में श्री कृष्ण और पहले के बहुत से ऋषियों ने कहा है। परमात्मा आपके भीतर ही है उसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है ।सहजयोग ध्यान एक ऐसा माध्यम है, जिससे आप अपनी आत्मा को जान सकते हैं। अपनी आत्मा को जाने बिना आप परमात्मा को नहीं जान सकते। अतः अपने को जानिए और अपना कल्याण कीजिए। सहजयोग द्वारा निःशुल्क आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है। अधिक जानकारी हेतु हमारे हेल्पलाइन नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।