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गंगा की मिट्टी, पेड़ों की छाल व घास फूस से तैयार कर रहे गणेश प्रतिमाएं

17 Sept 2023

पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गणेश प्रतिमाओं को दिया जा रहा मनमोहन आकार

उज्जैन। शहर की बंगाली कॉलोनी में कोलकाता से आए मूर्तिकार इन दिनों मिट्टी की आकर्षक गणेश प्रतिमाएँ बना रहे हैं। यह मूर्तियाँ 5 हजार से 50 हजार कीमत की है।


उल्लेखनीय है कि हर साल गणेश उत्सव पर छोटी से लेकर बड़ी गणेश प्रतिमाओं की अच्छी खासी मांग रहती है। लोग अब पर्यावरण सुरक्षा के लिए इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की स्थापना करने लगे हैं। यही कारण है कि सिंधी कॉलोनी स्थित बंगाली कॉलोनी में कोलकाता से आए कलाकार गंगा की मिट्टी, बैतूल की घांस, कानपुर के बांस, पेड़ों की छाल और पत्तियों से मूर्तियों का स्वरूप तैयार कर रहे हैं। कोलकाता से आए मूर्तिकार विजयपाल ने बताया कि वह 21 वर्षों से मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं। उनके द्वारा मूर्तियों का निर्माण इको फ्रेंडली मिट्टी से किया जाता हैं। इनके द्वारा निर्माण की गई मूर्तियाँ मात्र 2 घंटे में ही पानी में घुल जाती हैं। मूर्तियाँ बनाने के लिए 4 महीने पहले ही तैयारी शुरू कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि वह तथा उनके साथ आए आठ कलाकार हैं जो बंगाली मूर्तियों का निर्माण करते हैं। ग्राहकों की मांग के अनुसार मूर्तियों का निर्माण करते हैं। जैसा ऑर्डर आता है वैसी मूर्ति बनाई जाती है। उन्होंने आगे बताया कि ऑयल पेंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। पेड़ों की छाल व पत्तियों से बने हुए कलरों का उपयोग करते हैं। हमारे द्वारा 5 हजार से 50 हजार रुपए तक की प्रतिमा का निर्माण किया जाता है लेकिन फिर भी लागत और मेहनत के हिसाब से रुपया नहीं मिलता लेकिन संतुष्टि होती है। उज्जैन में 18 फीट तक प्रतिमा बनाने की अनुमति है। 14 से 15 फीट तक की प्रतिमा बनाई जाती हैं। 4 महीने में 100 से ज्यादा मूर्ति तक का निर्माण हो जाता है।


यह सामग्रियां उपयोग कर रहे मूर्तियों के निर्माण में


मूर्तियों के स्ट्रक्चर का निर्माण कानपुर से आए बांस से बनाया जा रहा है। बैतूल से धान की घास, नदी की मिट्टी, गंगा की मिट्टी, सफेद मिट्टी, डिस्टेम्पर पेंट का कलर कर उसे पूर्ण प्रतिमा का निर्माण किया जाता हैं। पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही मूर्तियों को बनाया जा रहा है।


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