
उज्जैन। नगर निगम परिषद का सम्मेलन 6 सितंबर को होना है। इसमें कई मुद्दों को लेकर हंगामा होने के आसार हैं। इनमें प्रमुख रूप से पार्षदों की मथुरा, वृंदावन यात्रा को लेकर कांग्रेस ने भाजपा बोर्ड को घेरने की तैयारी की है।

नगर निगम का साधारण सम्मेलन 6 सितंबर को आयोजित होना है। जिसमें शांति पैलेस चौराहे का नाम भगवान श्री परशुराम के नाम पर करने का प्रस्ताव निगम सम्मेलन में पेश किया जा सकता हैं ।पार्षद रामेश्वर दुबे ने इंदौर रोड के चौराहे का नाम पर भगवान परशुराम के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा है। दूसरी और दावा किया गया है कि पहले शांति पैलेस चौराहे का नाम सिखों के धर्मगुरु गुरुनानक के नाम पर रखने का प्रस्ताव निगम सम्मेलन में लाया जा चुका है। भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष इकबालसिंह गांधी ने यह प्रस्ताव रखा था। ऐसे में पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव का पार्टी में ही अंदरुनी विरोध चल रहा है।

मथुरा यात्रा में फिजूल खर्च, जरूरत क्या थी...
महापौर तथा उनकी पार्टी के 24 पार्षदों ने परिषद सम्मेलन से पहले कांग्रेस को बैठे-बैठे नया मुद्दा दे दिया है। इसके पीछे वजह यह है कि महापौर मुकेश टटवाल और भाजपा के 24 पार्षद हाल ही में मथुरा वृंदावन यात्रा पर गए थे। इसके लिए महापौर ने स्वच्छता मिशन का सहारा लिया। लेकिन इसमें वह बड़ी गलती कर गए। देश में 10 लाख तक आबादी वाले 100 शहरों में वृंदावन की स्वच्छता रेटिंग 49 है। जबकि उज्जैन का इसमें 27 वां नंबर है। ऐसे में स्वच्छता के मामले में अपने से नीचे पायदान वाले नगर में महापौर और उनके 24 पार्षद आखिर क्या सीखने गए थे स्वच्छता को लेकर। बताया जाता है कि इस यात्रा पर खर्च के लिए महापौर और पार्षद स्वच्छता मिशन मद से ढाई लाख रुपए नगद लेकर गए। यह राशि भी उन्होंने राजस्व विभाग के एक अधिकारी के माध्यम से ली। कुल मिलाकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम में महापौर और उनके भाजपा के 24 पार्षदों ने इस मर्द का दुरुपयोग किया और ऐसे शहर की यात्रा की जो स्वच्छता की रेटिंग में उज्जैन से कई पायदान पीछे है। कांग्रेस के विपक्षी पार्षदों का कहना है कि नगर निगम के सम्मेलन में हुए इस मुद्दे को उठाएंगे तथा महापौर और उनके पार्षदों से जनता के पैसे का दुरुपयोग का हिसाब मांगा जाएगा।
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